हेरी सखी लिरिक्स (Heri Sakhi Lyrics in Hindi) – Megha Bhardwaj

हेरी सखी के लोक-शैली के प्यारे बोल – Megha Bhardwaj की आवाज़ में पिया के स्वागत की खुशी। सजाओ आँगन, गाओ मंगल गीत। पढ़ें लिरिक्स।

Heri Sakhi Song Poster from Megha Bhardwaj

Heri Sakhi Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (हेरी सखी)

चोख पुरावो, माटी रंगावो
आज मेरे पिया घर आवेंगे
आज मेरे पिया घर आवेंगे

खबर सुनाऊँ जो, खुशी री बताऊँ जो
आज मेरे पिया घर आवेंगे
आज मेरे पिया घर आवेंगे

हेरी सखी, मंगल गाओ री
धरती अम्बर सजाओ री
उतरेगी आज मेरे पिया की सवारी

हे री, कोई काजल लाओ री
मोहे काला टीका लगाओ री
उनकी छब से दिखूँ मैं तो प्यारी

लक्ष्मी जी वारो, नज़र उतारो
आज मेरे पिया घर आवेंगे
आज मेरे पिया घर आवेंगे

रंगों से रंग मिले
नए-नए ढंग खिले
खुशी आज द्वारे मेरे डाले है डेरा

पिहू-पिहू पपीहा रटे
कुहू-कुहू कोयल जपे
आँगन-आँगन है परियों ने घेरा

अनहत नाद बजाओ री सब मिल
आज मेरे पिया घर आवेंगे
आज मेरे पिया घर आवेंगे

अनहत नाद बजाओ री सब मिल
रंग गुलाल उड़ाओ री सब मिल
अनहत नाद बजाओ री सब मिल
ढोल मृदंग बजाओ री सब मिल..!

👉 In Romanized - Heri Sakhi Lyrics

गीतकार: कैलाश खेर, कुणाल वर्मा


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About Heri Sakhi (हेरी सखी) Song

यह गीत "हेरी सखी" (Heri Sakhi) है, जिसे मेघा भारद्वाज (Megha Bhardwaj) ने गाया है। इसके बोल कैलाश खेर (Kailash Kher) और कुणाल वर्मा (Kunaal Vermaa) ने लिखे हैं, जबकि संगीत जैकी वंजारी (Jackie Vanjari) ने तैयार किया है। यह एक पारंपरिक लोक-शैली का गीत है, जिसमें एक स्त्री अपने पिया (प्रियतम) के घर आने की खुशी में सब कुछ सजाने-संवारने को कहती है। 

गीत की शुरुआत "चोख पुरावो, माटी रंगावो" से होती है, यानी आँगन को साफ करो और मिट्टी को रंगीन बनाओ क्योंकि आज पिया घर आ रहे हैं। फिर वह "हेरी सखी" यानी अपनी सहेली से कहती है कि मंगल गीत गाओ, धरती और आसमान को सजाओ, क्योंकि पिया की सवारी उतरने वाली है। इसके बाद वह काजल और टीका माँगती है ताकि वह पिया के सामने प्यारी लगे। 

गीत में लक्ष्मी जी से भी प्रार्थना है कि वे नज़र उतारें (बुरी नज़र से बचाएँ)। फिर वर्णन है कि रंगों से नए ढंग खिल रहे हैं, खुशी ने द्वार पर डेरा डाला है, पपीहा और कोयल की बोली सुनाई दे रही है, और आँगन में परियों ने घेरा डाला है। अंत में "अनहत नाद" (बिना बजाए उठने वाली ध्वनि) बजाने, रंग गुलाल उड़ाने और ढोल-मृदंग बजाने के लिए कहा जाता है, यानी पूरे उत्सव और आनंद के साथ पिया के स्वागत की तैयारी है।