साहिब तेरी बंदियाँ के सूफी भक्ति बोल – Megha Bhardwaj की आवाज़। साहिब तेरी बंदी आं, मंदी आं के चंगी आं – समर्पण और प्रेम का संदेश। पढ़ें लिरिक्स।
Sahib Teri Bandiyaan Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (साहिब तेरी बंदियाँ)
साहिब तेरी बंदी आं
मंदी आं के चंगी आं
मंदी आं के चंगी आं
साहिब तेरी मैं,
साहिब तेरी बंदी आं
साहिब तेरी बंदी आं
मंदी आं के चंगी आं
मंदी आं के चंगी आं
कमले लोक कहन दीवानी
कमले लोक कहन दीवानी
मैं रंग मुरशद विच रंगी आं
मैं रंग मुरशद विच रंगी आं
मंदी आं के चंगी आं
मंदी आं के चंगी आं
साहिब तेरी मैं,
साहिब तेरी बंदी आं
मैं साहिब तेरी बंदी बंदी आं
साहिब तेरी बंदी आं
साहिब तेरी बंदी आं
मंदी आं के चंगी आं
मंदी आं के चंगी आं
अज्ज दी गल नहीं रांझण यारा
अज्ज दी गल नहीं रांझण यारा
मैं अज़लों तेरे नाल मंगी आं
मैं अज़लों तेरे नाल मंगी आं
मंदी आं के चंगी आं
मंदी आं के चंगी आं
साहिब तेरी बंदी आं
मंदी आं के चंगी आं
मंदी आं के चंगी आं
साजन मेरा अखियां विच वसदा
साजन मेरा अखियां विच वसदा
मैं गलियां फिरां नशंगियां
मैं गलियां फिरां नशंगियां
मंदी आं के चंगी आं
मंदी आं के चंगी आं
साहिब तेरी मैं,
साहिब तेरी बंदी आं
मैं साहिब तेरी बंदी बंदी आं
साहिब तेरी बंदी आं
साहिब तेरी बंदी आं
मंदी आं के चंगी आं
मंदी आं के चंगी आं...!
👉 In Romanized - Sahib Teri Bandiyaan Lyrics
गीतकार: नुसरत फतेह अली खान
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About Sahib Teri Bandiyaan (साहिब तेरी बंदियाँ) Song
यह पेज आपको मशहूर सूफी गीत "Sahib Teri Bandiyaan" के बोल दिखाता है, जिसे Megha Bhardwaj ने अपनी आवाज़ दी है और Swapnil Tare ने म्यूज़िक प्रोड्यूस किया है। इस गाने के लिरिक्स महान सूफी गायक Nusrat Fateh Ali Khan साहब के लिखे हुए हैं, और इसमें गिटार पर Shomu Seal का शानदार वादन है। इस गाने के म्यूज़िक वीडियो में Navveen Sharma और Riney Aryaa नज़र आते हैं, और इसे Megha Bhardwaj के अपने म्यूज़िक लेबल पर रिलीज़ किया गया है।
"Sahib Teri Bandiyaan" एक भक्ति और प्रेम भरा सूफी गीत है, जिसमें इंसान अपने मालिक (साहिब) के सामने अपनी बंदगी और समर्पण जताता है। गाने के बोल "साहिब तेरी बंदी आं, मंदी आं के चंगी आं" का मतलब है कि मैं तेरी बंदी हूँ, चाहे मैं बुरी हूँ या अच्छी, तू ही मेरा मालिक है। यह गीत बताता है कि इंसान अपने रब या मुरशद (गुरु) के रंग में कैसे रंग जाता है और दुनिया के लोग उसे दीवाना कहते हैं, लेकिन उसे इस बात की परवाह नहीं है।
गाने में आगे "अज्ज दी गल नहीं रांझण यारा, मैं अज़लों तेरे नाल मंगी आं" लाइन आती है, जो यह कहती है कि यह प्यार आज का नहीं है, बल्कि मैं अनादि काल से तेरे साथ जुड़ी हुई हूँ। और "साजन मेरा अखियां विच वसदा, मैं गलियां फिरां नशंगियां" लाइन से पता चलता है कि प्रियतम (साजन) मेरी आँखों में बसता है, इसलिए मैं बेसुध होकर गलियों में घूमती फिरती हूँ। इस तरह यह गीत सूफी अध्यात्म, प्रेम और समर्पण का गहरा संदेश देता है, जो हर किसी के दिल को छू लेता है।