भोले शंकर खोल जटाएं लिरिक्स (Bhole Shankar Khol Jatayein Lyrics in Hindi) – Nikhar Juneja

भोले शंकर खोल जटाएं के क्रांतिकारी बोल | एक शक्तिशाली प्रार्थना जो भक्ति के साथ सामाजिक पाखंड के विरुद्ध आवाज़ उठाती है। Nikhar Juneja का विशेष भजन।

Bhole Shankar Khol Jatayein Song Poster from Bhakti Bhajan

Bhole Shankar Khol Jatayein Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (भोले शंकर खोल जटाएं)

उपहास कमा कर आया हूँ 
इतिहास बनाकर जाउँगा 
इस बार भी गाने के आखिर में 
सबको रुलाकर जाउँगा 

पाखंड का परचम ऊँचा है 
उसे खींच के नीचे लाऊंगा 
अकेले तो कर सकता नहीं 
शंकर के साथ में आऊंगा मैं 

एक दिन ऐसा होगा 
जब उलट फेर संसार का होगा 
आवाज बेजुबानों की गूंजे 
वक्त निखार का होगा 

हाँ काल प्रलय का हो 
संघार की ज्वाला जली रहेगी 
और बली चढ़ाने वालों की ही 
उस पर बली चढ़ेगी 

ओ भोले शंकर खोल जटाएं 
ओ भोले शंकर खोल जटाएं 
ब्रह्म भयंकर खेल रचाए 
कष्ट खत्म कर, भैरव दिगंबर 
नाद हो जम कर भष्म रमाए 

ओ भोले शंकर खोल जटाएं 
ब्रह्म भयंकर खेल रचाए 
रुद्र शुभंकर करके कलम सर 
वीरभद्र विध्वंश मचाए 

हर भष्म अंग हर नंग धड़ंग 
हर हर बेडंग हो कर मलंग 
हर शीश गंग करपूर रंग 
वसु की भुजंग विषधर विसंग 

ना भेद सके भाला खड़ंग 
हर अंग भंग करे भंग नंग 
पाखंड से है घनघोर जंग 
कितने कलंग कर देवे भंग 

पीड़ा के बदले पीड़ा देना 
शंकर क्या ये बात सही? 
जो व्यक्त ना करता पीड़ा को 
उसको होता संताप नहीं 

रचना जैसी की थी तुमने 
शिव अब ये वो संसार नहीं 
तू ध्यान मगन है जाने कहाँ 
अब त्रिलोकी में निखार नहीं है 

एक दिन ऐसा होगा 
जब उलट फेर संसार का होगा 
आवाज बेजुबानों की गूंजे 
वक्त निखार का होगा 
हाँ काल प्रलय का हो 
संघार की ज्वाला जली रहेगी 
और बली चढ़ाने वालों की ही 
उस पर बली चढ़ेगी 

ओ भोले शंकर खोल जटाएं 
ब्रह्म भयंकर खेल रचाए 
कष्ट खत्म कर, भैरव दिगंबर 
नाद हो जम कर भष्म रमाए 
ओ भोले शंकर खोल जटाएं 
ब्रह्म भयंकर खेल रचाए 
रुद्र शुभंकर करके कलम सर 
वीरभद्र विध्वंश मचाए 

लिखकर पीड़ा इनकी क्यों? 
फूट पड़े आँसू ये मेरे 
शंकर इन्साफ करो ना 
टूट रहे प्राणी अब तेरे 

अब सुना नहीं जाता ये 
फूट फूट कर मृत्यु का रोना 
महाकाल चलो दोषी का 
कपाल फोड़ कर नृत्य करो ना 

तेरे तीसरे नैन को खुलता 
देखने नैन निखर के तरसे 
हर एक पापी भक्षक पे 
अग्नि अब संघार की बरसे 

कैसी निर्लज्जता है? कि 
प्रातः जल शिवलिंग चढ़ाये 
हो शाम को पशुपति के 
पशुओं का ही मांस चबाये 

बेचारा नंदी अब 
शिवशंकर को ढूँढ रहा 
शिव द्वारे अपने पिटता देख भी 
आँखें मूँद रहा 
बोलो कलयुग में जागती है क्या? 
ममता गौरा मैया की 
जब देखे जर्जर हालत वो 
इंसान से पीड़ित गैया की 

अब देखो गली गली में 
भस्मासुर ही घूम रहे 
शिव भक्ति पाकर 
वो शिव भक्तों को ही घूर रहे 

जो एक हाथ वरदान करे 
हर एक साँस अभिमान करे 
ऐसे निर्मोही लोभी का 
शंकर कैसे कल्याण करे? 

एक दिन ऐसा होगा 
जब उलट फेर संसार का होगा 
आवाज बेजुबानों की गूंजे 
वक्त निखार का होगा 
हाँ काल प्रलय का हो 
संघार की ज्वाला जली रहेगी 
और बली चढ़ाने वालों की ही 
उस पर बली चढ़ेगी 

ओ भोले शंकर खोल जटाएं 
ब्रह्म भयंकर खेल रचाए 
कष्ट खत्म कर, भैरव दिगंबर 
नाद हो जम कर भष्म रमाए 
ओ भोले शंकर खोल जटाएं 
ब्रह्म भयंकर खेल रचाए 
रुद्र शुभंकर करके कलम सर 
वीरभद्र विध्वंश मचाए...!

गीतकार: निखर जुनेजा


About Bhole Shankar Khol Jatayein (भोले शंकर खोल जटाएं) Song

यह गाना "भोले शंकर खोल जटाएं" है, जिसे Nikhar Juneja ने गाया, compose किया और लिखा है, वे Wagheshwari Mata Mandir के founder भी हैं, music production, mixing और mastering भी Nikhar Juneja द्वारा किया गया है, और यह Nikhar Juneja के music label के तहत release हुआ है। 
गाने के lyrics में एक गहरी social और spiritual message है, जो भगवान शिव से प्रार्थना करते हुए समाज में फैले पाखंड के खिलाफ आवाज उठाते हैं, lyrics कहते हैं कि मैं उपहास का पात्र बनकर आया हूँ, लेकिन इतिहास रचकर जाऊँगा, इस बार गाने के अंत में सबको रुलाकर जाऊँगा, पाखंड का झंडा बहुत ऊँचा है, मैं उसे नीचे खींच लाऊँगा, अकेले यह नहीं कर सकता, इसलिए शंकर के साथ मिलकर आऊँगा। 

गाना एक नए युग की कल्पना करता है, जहाँ दुनिया का उलटफेर होगा, बेजुबानों की आवाज गूंजेगी, और एक निखार का समय आएगा, यहाँ तक कि प्रलय का काल भी आ सकता है, जहाँ संहार की ज्वाला जलेगी, और बलि चढ़ाने वालों की ही बलि चढ़ेगी, chorus में भोले शंकर से जटाएं खोलने की विनती है, ताकि एक भयंकर लेकिन न्यायपूर्ण खेल रचा जा सके, भैरव दिगंबर कष्टों को खत्म करें, और एक शक्तिशाली नाद से सब कुछ भस्म कर दें, रुद्र और वीरभद्र जैसे रूपों से विध्वंश मचाया जाए। 

आगे के verses में समाज की कड़ी आलोचना है, lyrics पूछते हैं कि क्या पीड़ा के बदले पीड़ा देना सही है, शिव से कहा जाता है कि यह दुनिया अब वैसी नहीं रही जैसी तुमने बनाई थी, तुम ध्यान में मगन हो, और त्रिलोकी में अब निखार नहीं है, गाना आज के युग में फैले ढोंग पर भी चोट करता है, जहाँ लोग सुबह शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और शाम को पशुओं का मांस खाते हैं, नंदी की दुर्दशा और गायों के प्रति क्रूरता का जिक्र है, साथ ही भस्मासुर जैसे लोगों का उल्लेख है जो शिव भक्ति का लाभ उठाकर दूसरों को डराते हैं, अंत में फिर से उसी उम्मीद का repetition है कि एक दिन सब बदलेगा, बेजुबानों की आवाज सुनी जाएगी, और न्याय का समय आएगा, गाना अपनी powerful lyrics और ऊर्जावान composition के जरिए श्रोता को एक आध्यात्मिक और सामाजिक विचार की journey पर ले जाता है।