जाग उठे डमरूधारी के जागरण बोल | Nikhar Juneja का शक्तिशाली शिव-स्तुति गीत। महाकाल के जागरण और पाप के विनाश के इस आह्वान को पूरी श्रद्धा से सुनें। लिरिक्स यहाँ पढ़ें।
Jaag Uthe Damrudhari Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (जाग उठे डमरूधारी)
अब ना तू सकल कामना कर
नाश ये अटल है
हर पाप पर प्रहार
सर्वनाश का ये पल है
प्रयास सारे कर्मकाण्ड
दुष्ट क्यों विकल है?
त्रिनेत्र खुल गए है
पश्चाताप अब विफल है
धधक रही चिता की अग्नि
जगप्रकाश हो
फिर एक बार शिव ज़रा
त्रिपुरविनाश हो
हुआ विकर्म पापकर्म
सर्वनाश हो
हाँ तामसी अधर्मी के
गले में पाश हो
बम बम बम
हाँ जाग उठे डमरुधारी
बम बम बम
हाँ जल उठेगी दुनिया सारी
बम बम बम
हुआ भस्म रमण नाद भारी
बम बम बम बम
बम बम बम बम
बम बम बम
हाँ जाग उठे डमरुधारी
बम बम बम
हाँ जल उठेगी दुनिया सारी
बम बम बम
हुआ भस्म रमण नाद भारी
बम बम बम बम
बम बम बम बम
सब छोड़ छाड़
त्याग करे ना जाप,
कैसा डर है?
भगवान के जो नाम करके
काटे इतने सर हैं
पापों का ये असर है
कलयुग का ये सफर है
लोभी करम से पहले तेरी
फल पे जो नज़र है
धधक रही चिता की अग्नि
जगप्रकाश हो
फिर एक बार शिव ज़रा
त्रिपुरविनाश हो
हुआ विकर्म पापकर्म
नरसंहार हो
तमस की हार
एक बार फिर निखार हो
बम बम बम
हाँ जाग उठे डमरुधारी
बम बम बम
हाँ जल उठेगी दुनिया सारी
बम बम बम
हुआ भस्म रमण नाद भारी
बम बम बम बम
बम बम बम बम
अग्नि चपल, पापी अचल
होके मचल, जाए उबल
मौत के पल दर्शन कर
काल का दल, श्याम शबल
जाग उठा शिव शंकर
नाद हुआ, नाश अटल
देख महाकाल का बल
त्यागे सुधा, पीता गरल
नरक की आग में जलेगा कैसे अत्याचारी
तलेगा कुंभीपाक में जिसे विनाशकारी
तड़पता बेज़ुबान भोग बैठा मांसाहारी
पधारे दंडलोक यम महिष पर सवारी
करुणा वो काल भी
महेश महाकाल भी
कुपित हुआ पशुपति
कृपाल भी कराल भी
स्वर्ग का दयाल भी
नरक का वो संभाल भी
व्याल चंद्रभाल भी
नरखाल मुण्डमाल भी
धधक रही चिता की अग्नि
जगप्रकाश हो
फिर एक बार शिव ज़रा
त्रिपुरविनाश हो
हुआ विकर्म पापकर्म
सर्वनाश हो
हाँ तामसी अधर्मी के
गले में पाश हो
बम बम बम
हाँ जाग उठे डमरुधारी
बम बम बम
हाँ जल उठेगी दुनिया सारी
बम बम बम
हुआ भस्म रमण नाद भारी
बम बम बम बम
बम बम बम बम....!
गीतकार: निखर जुनेजा
About Jaag Uthe Damrudhari (जाग उठे डमरूधारी) Song
यह गाना "जाग उठे डमरूधारी" (Jaag Uthe Damrudhari) एक शक्तिशाली भक्ति और जागरण गीत है, जिसे Nikhar Juneja ने गाया, संगीतबद्ध किया और लिखा है, Nikhar Juneja Wagheshwari Mata Mandir के संस्थापक भी हैं, और उन्होंने इस गाने का Music Production, Mixing और Mastering भी किया है, Music Label भी Nikhar Juneja ही है।
गीत की शुरुआत में ही एक गहरा संदेश है, "अब ना तू सकल कामना कर, नाश ये अटल है", यानी सभी इच्छाओं को छोड़ो क्योंकि विनाश निश्चित है, यह गीत भगवान शिव के क्रोध और न्याय की ताकत को दर्शाता है, जहाँ हर पाप पर प्रहार होगा और सर्वनाश का पल आएगा, गीत में "प्रयास सारे कर्मकाण्ड, दुष्ट क्यों विकल है?" जैसे पंक्तियों से पता चलता है कि बुराई के सामने सभी रीति-रिवाज और प्रयास विफल हो जाते हैं, क्योंकि भगवान शिव का त्रिनेत्र खुल गया है और पश्चाताप अब काम नहीं आएगा।
गीत में "धधक रही चिता की अग्नि, जगप्रकाश हो" जैसी पंक्तियाँ हैं, जो दुनिया को प्रकाशित करने वाली अग्नि का वर्णन करती हैं, और भगवान शिव से त्रिपुरविनाश की प्रार्थना करती हैं, गीत बार-बार "बम बम बम" के जयकारे के साथ "जाग उठे डमरुधारी" का उद्घोष करता है, यह दर्शाता है कि डमरू बजाने वाले भगवान शिव जाग उठे हैं और पूरी दुनिया को अपनी शक्ति से प्रकाशित करेंगे, "हुआ भस्म रमण नाद भारी" जैसी पंक्तियाँ शिव के नाद और विनाश की भयानक शक्ति को दिखाती हैं, गीत में कहा गया है कि पापों का असर और कलयुग का सफर चल रहा है, और लोभी व्यक्ति पहले फल पर नज़र रखते हैं, जबकि भगवान के नाम लेकर भी लोग डरते हैं।
आगे के भाग में, गीत महाकाल के रूप में शिव के भयानक और दयालु दोनों रूपों को दर्शाता है, "करुणा वो काल भी, महेश महाकाल भी" जैसी पंक्तियाँ बताती हैं कि शिव दयालु भी हैं और क्रोधित भी, वे स्वर्ग के दयालु भी हैं और नरक का संभालने वाले भी, गीत के अंत में फिर से "त्रिपुरविनाश" और "सर्वनाश" का ज़ोरदार उल्लेख है, जो बुराई के विनाश और धर्म की जीत का संकेत देता है, समग्र रूप से, यह गाना भक्ति, जागरण और न्याय का एक शक्तिशाली संगम है, जो शिव की महिमा और बुराई के विनाश का आह्वान करता है।