मुझको वो गिलहरी बनना है भजन के बोल | Nikhar Juneja का यह आध्यात्मिक गीत प्रत्येक जीव में ईश्वर की उपस्थिति का संदेश देता है। सभी प्राणियों के प्रति प्रेम और समभाव का पाठ।
Mujhko Wo Gilhari Banna Hai Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (मुझको वो गिलहरी बनना है)
छोटे से छोटे जीव में
परमात्मा ही है क्या?
क्या सबके अंदर रहता है?
इंसान में भी है क्या?
जब हर वस्तु में रहता वो
तो भेद करें क्यों हम?
क्यों हाड़-मांस है ऊपर
और माटी क्यों उससे कम?
माटी माथे पे लगती
जो राम के पड़े कदम
जिसके भी अंदर जान है
वो भगवान के लिए है सम
जो कुछ भी इस ब्रह्मांड में है
भगवान के लिए है सम
मुझको वो गिलहरी...
मुझको वो गिलहरी बनना है
श्री राम ने जिसको स्पर्श किया
मुझको वो गिलहरी बनना है
श्री राम ने जिसको स्पर्श किया
हर वो प्राणी बहुमूल्य है
भगवान ने जिसको जन्म दिया
मुझको वो गिलहरी बनना है
मेरे राम ने जिसको स्पर्श किया
उस पत्थर की क्या नियती है
प्रभु के समान बैठाया है
अर्थात ये कोई भरम नहीं
कण-कण में प्रभु ही समाया है
हम सब में प्रभु ही समाया है
अज्ञानी जिसको ज्ञान नहीं
कहता के यहाँ भगवान नहीं
मुझको वो गिलहरी बनना है
श्री राम ने जिसको स्पर्श किया
हर वो प्राणी बहुमूल्य है
भगवान ने जिसको जन्म दिया
मुझको वो गिलहरी बनना है
मेरे राम ने जिसको स्पर्श किया
निर्बल की सेवा करता रहा
इस कर्म पे मुझको खेद नहीं
हर जीव-जंतु में रहता है
प्रभु के मन में भेद नहीं
प्रभु के मन में भेद नहीं
युधिष्ठिर के संग स्वर्ग गया
उस स्वान ने कैसा धर्म किया
मुझको वो गिलहरी बनना है
श्री राम ने जिसको स्पर्श किया
हर वो प्राणी बहुमूल्य है
भगवान ने जिसको जन्म दिया
मुझको वो गिलहरी बनना है
मेरे राम ने जिसको स्पर्श किया
मूषक पे विराज गणेश हो
या शंकर के प्यारे नंदी हो
भैरव के संग में स्वान हो या
फिर देवदत्त पर कल्कि हो
खूंखार शेर है मैया का
कृष्णा है दीवाना गैया का
ईश्वर ने यही तो सिखाया है
हर जीव में वही समाया है
जहर दिया मूषक को भी
नंदी को तुमने काट दिया
सेहमा बैठा है स्वान यहाँ
और देवदत्त को मार दिया
गैया को देख के कृष्णा भी
अब फूट फूट कर रोने लगा
मैया के शेर को पीड़ा दे
तू सर्वनाश की ओर बढ़ा
हर प्राणी में भगवान बसा
कहता ये हर इंसान रहा
जब उस प्राणी पर जुल्म किए
रोता अंदर भगवान है क्या?
एक रूप की पूजा करता रहा
और दूजे रूप को दर्द दिया
क्या सबके अंदर रहता है?
इंसान में भी भगवान है क्या?
क्या सबके अंदर रहता है?
इंसान में भी भगवान है क्या?
इंसान से बड़ा हैवान है क्या?
इंसान में भी भगवान है क्या?
इंसान से बड़ा हैवान है क्या?
इंसान में भी भगवान है क्या...?
गीतकार: निखर जुनेजा
About Mujhko Wo Gilhari Banna Hai (मुझको वो गिलहरी बनना है) Song
यह गाना "मुझको वो गिलहरी बनना है", जिसका original title "Mujhko Wo Gilhari Banna Hai" है, एक गहरा आध्यात्मिक message देता है, यह गाना singer, composer और lyricist Nikhar Juneja (संस्थापक, Wagheshwari Mata Mandir) द्वारा created किया गया है, जिन्होंने इसे produce, mix और master भी किया है, additional vocals Ravindra Pratap Singh के हैं और music label Nikhar Juneja ही है।
इस गाने के lyrics एक बहुत basic सवाल से शुरू होते हैं - क्या छोटे से छोटे जीव में भी परमात्मा है, क्या हर किसी के अंदर भगवान रहता है, यहाँ तक कि इंसान में भी, फिर lyrics कहते हैं कि जब भगवान हर चीज़ में है, तो हम भेदभाव क्यों करते हैं, क्यों हम हाड़-मांस को ऊपर और माटी को कम समझते हैं, जबकि वही माटी भगवान के पैरों से स्पर्श पाकर पवित्र हो जाती है, गाने का मुख्य भाव यही है कि इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी है, वह भगवान के लिए समान है।
फिर गाना अपने title वाले concept पर आता है - "मुझको वो गिलहरी बनना है", यानी वह गिलहरी बनने की इच्छा जिसे श्री राम ने स्पर्श किया था, lyrics कहते हैं कि हर वो प्राणी बहुमूल्य है जिसे भगवान ने जन्म दिया है, फिर गाना examples देता है, जैसे युधिष्ठिर के साथ स्वर्ग जाने वाला स्वान (कुत्ता), या फिर देवदत्त (घोड़ा), और बताता है कि भगवान हर जीव-जंतु में रहते हैं और उनके मन में कोई भेद नहीं है, गाने में गणेश जी का मूषक, शिव का नंदी, भैरव का स्वान, कृष्ण की गाय और माँ दुर्गा का शेर जैसे उदाहरण देकर यह समझाया गया है कि ईश्वर ने हमें यही सिखाया है कि हर जीव में वही समाया हुआ है।
अंत में गाना एक powerful question पूछता है - जब हम एक रूप (जैसे मूर्ति) की पूजा करते हैं और दूसरे रूप (जैसे जानवर) को दर्द देते हैं, तो क्या सच में सबके अंदर भगवान है, क्या इंसान में भी भगवान है, या फिर इंसान से बड़ा हैवान है, यह गाना listeners को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि हमारे actions कितने विरोधाभासी हैं, और हमें सभी प्राणियों के प्रति समभाव और प्रेम रखना चाहिए।