ओ सबके पालनहारी लिरिक्स (O Sabke Palanhaari Lyrics in Hindi) – Nikhar Juneja

ओ सबके पालनहारी के बोल | Nikhar Juneja का यह गहन भक्ति गीत भगवान शिव से एक आर्त भक्त की पुकार है। एक मार्मिक सामाजिक संदेश से युक्त प्रार्थना।

O Sabke Palanhaari Song Poster from Bhakti Bhajan

O Sabke Palanhaari Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (ओ सबके पालनहारी)

ओ सबके पालनहारी 
तेरे द्वारे भीड़ भारी 
जब सबकी सुन लेगा 
तो आएगी ना मेरी बारी 

मैं बोल ना पाऊं तो क्या? 
तू आँखें पढ़ सकता है 
मेरी आवाज नहीं तो 
दिल की धड़कन सुन सकता है 

जब सबको देता तू तो 
मैं क्यों छूट गया हूँ? 
मेरी आस नहीं सुनता शिव 
मुझसे रूठ गया तू 

अब कितना और मैं चीखूं? 
के तुझको सुनाई दे 
या सुनकर भी अनसुना करता 
कैसी ये रुसवाई है? 

ओ सबके पालनहारी 
तेरे द्वारे भीड़ भारी 
जब सबकी सुन लेगा 
तो आएगी ना मेरी बारी 

मैं बोल ना पाऊं तो क्या? 
तू आँखें पढ़ सकता है 
मेरी आवाज नहीं तो 
दिल की धड़कन सुन सकता है। 

मैं मूक तेरे भक्तों को 
तेरे मंदिर लेकर आया। 
तेरे द्वारे तक तो पहुँच गया 
पर अंदर जा ना पाया। 
मैं मूक तेरे भक्तों को 
तेरे मंदिर लेकर आया। 
तेरे द्वारे तक तो पहुँच गया 
पर अंदर जा ना पाया। 

ये बोझ है मुझ पर ऐसा 
कि नंदी ढो ना पाए। 
मेरे कष्टों को तू देख ले शिव 
तेरी आँखें भर आएगी। 

अंधे को आँखें देते 
प्यासे को गंगा की धार 
जुबान मुझे कब दोगे 
बोलो ना करुणा अवतार 

अब कितना और मैं चीखूं? 
के तुझको सुनाई दे 
या सुनकर भी अनसुना करता 
कैसी ये रुसवाई है? 

ओ सबके पालनहारी 
तेरे द्वारे भीड़ भारी 
जब सबकी सुन लेगा 
तो आएगी ना मेरी बारी 
मैं बोल ना पाऊं तो क्या? 
तू आँखें पढ़ सकता है 
मेरी आवाज नहीं तो 
दिल की धड़कन सुन सकता है। 

सतयुग की गौ देवी को 
श्री राम मिले त्रेता युग में 
द्वापर में कृष्ण की गैया जो 
उसे कौन बचाए कलयुग में? 

जो युगों युगों सत्कार किया 
कैसे वो लाचार हुई? 
जो असुरों को थी झेल गयी 
पर मानव से वो हार गयी 

अब राम नहीं, ना कृष्णा है 
ना मुरली, ना है बाण धनुष 
अमृत असुरों के हिस्से में 
और शिव भक्तों के मुख पर विष 

रघुनंदन राजा राम कहाँ? 
नंदलाला कैसी लीला है? 
शिव पशुपति का न्याय कहाँ? 
जब बेजुबान को चीला है 

जो दशानन भी कर न सका 
वो काम किया हत्यारों ने 
शिव के चरणों में बैठा 
नंदी बिकता है बाजारों में 

भूखा वो घायल प्यासा है 
और धूप में तपता फिरता है 
जो द्वारपाल शिव के घर का 
शिव मंदिर पर ही मरता है 

जब सबको देता तू तो 
मैं क्यों छूट गया हूँ? 
मेरी आस नहीं सुनता शिव 
मुझसे रूठ गया तू 
अब कितना और मैं चीखूं? 
के तुझको सुनाई दे 
या सुनकर भी अनसुना करता 
कैसी ये रुसवाई है? 

ओ सबके पालनहारी 
तेरे द्वारे भीड़ भारी 
जब सबकी सुन लेगा 
तो आएगी ना मेरी बारी 
मैं बोल ना पाऊं तो क्या? 
तू आँखें पढ़ सकता है 
मेरी आवाज नहीं तो 
दिल की धड़कन सुन सकता है 

मेरी आवाज नहीं तो 
दिल की धड़कन सुन सकता है....!

गीतकार: निखर जुनेजा


About O Sabke Palanhaari (ओ सबके पालनहारी) Song

यह भक्ति गीत "ओ सबके पालनहारी" Nikhar Juneja द्वारा गाया, लिखा और composed किया गया है, जो Wagheshwari Mata Mandir के संस्थापक भी हैं। इस गीत में एक भक्त की पीड़ा और उसकी गहरी उम्मीद को दर्शाया गया है, जो भगवान शिव से सीधे संवाद कर रहा है, गीत की शुरुआत "ओ सबके पालनहारी" से होती है, जहाँ भक्त कहता है कि भगवान के द्वार पर भीड़ बहुत है, और उसे डर है कि जब भगवान सबकी सुन लेंगे, तो उसकी बारी नहीं आएगी, फिर वह कहता है कि अगर वह बोल नहीं सकता, तो क्या हुआ, क्योंकि भगवान तो उसकी आँखें पढ़ सकते हैं और अगर आवाज़ नहीं है, तो दिल की धड़कन भी सुन सकते हैं।

गीत में भक्त अपनी व्यथा बताता है कि वह मूक भक्तों को भगवान के मंदिर तक लेकर आया, पर अंदर नहीं जा पाया, उस पर इतना बोझ है कि नंदी भी नहीं ढो सकते, और वह भगवान से अपने कष्ट देखने की प्रार्थना करता है, वह पूछता है कि भगवान अंधे को आँखें देते हैं, प्यासे को गंगा की धार देते हैं, पर उसे जुबान कब देंगे, फिर गीत एक गहरे सामाजिक संदेश की तरफ मुड़ता है, जहाँ युगों की बात की जाती है, सतयुग की गौ, त्रेता में श्री राम, द्वापर में कृष्ण की गायों की चर्चा है, और सवाल है कि कलयुग में उन्हें कौन बचाएगा, गीत कहता है कि जो गाय युगों-युगों से पूजी गई, वह आज लाचार है, और असुरों से तो लड़ गई, पर मानव से हार गई।

आज के समय में राम नहीं हैं, कृष्ण नहीं हैं, मुरली या धनुष नहीं है, अमृत असुरों के हिस्से में है और शिव भक्तों के मुख पर विष है, गीत पूछता है कि रघुनंदन राजा राम कहाँ हैं, नंदलाला की यह कैसी लीला है, और शिव पशुपति का न्याय कहाँ है, जब बेजुबान को चीरा जा रहा है, जो काम दशानन भी नहीं कर सका, वह हत्यारों ने कर दिया, और शिव के चरणों में बैठा नंदी आज बाजारों में बिकता है, वह भूखा, घायल, प्यासा है और धूप में तपता फिरता है, जो शिव के घर का द्वारपाल था, वही शिव मंदिर पर मरता है, अंत में भक्त फिर वही प्रश्न दोहराता है कि जब भगवान सबको देते हैं, तो वह क्यों छूट गया है, और कब तक चीखेगा, क्या भगवान सुनते भी हैं या अनसुना कर देते हैं, यह रुसवाई कैसी है, और फिर "ओ सबके पालनहारी" के साथ गीत समाप्त होता है, यह गीत सिर्फ एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश देता है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है।