शंकर पशुपति तू है लिरिक्स (Shankar Pashupati Tu Hai Lyrics in Hindi) – Nikhar Juneja

शंकर पशुपति तू है के बोल | Nikhar Juneja का शक्तिशाली शिव भजन। यह गीत भक्ति, प्रतिशोध और दैवीय न्याय की गहन भावनात्मक यात्रा है। पूरे लिरिक्स यहाँ पढ़ें।

Shankar Pashupati Tu Hai Song Poster from Bhakti Bhajan

Shankar Pashupati Tu Hai Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (शंकर पशुपति तू है)

हम मार लो मुझे
सवार मुझ पे हो चलो ना
भभकती आग में तपा के
मुझको भोग लो ना

ये मेरे इस जन्म का
दर्दनाक अंत है
मैं लौट जाऊँगा
जहाँ पे आदि और अनंत है

जहान कापेगा
प्रचंड रूप नित्य होगा
पाखंडियों के दुष्कर्म का
दंड मृत्य होगा
जो मेरी चीखें सुनके
तृप्त मुझसे हो रहे थे
हाँ मेरा भोलेनाथ
उन सभी का अंत होगा

है आँखें बंद तो
परंतु जब भी वो जगा है
हुआ है खाक सब
अधर्म भी तबाह हुआ है
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं
तनोतु नः शिवः शिवम्

शिव शंभू, मैं इंतजार कर रहा हूँ
शिव शंभू, तेरे लिए मैं मर रहा हूँ
शिव शंभू, हाँ साथ ले चलो मुझे
अधर्मियों के बीच
वेदना से मैं गुजर रहा हूँ

शिव शंभू, जमीं प्रलय की ओर मोड़े
शिव शंभू, पाखंडियों की खाल ओढ़े
शिव शंभू, दशानन लंकापति का
अहंकार अभिमान
एक चरण की थाप तोड़े

व्यथा सुनाऊँगा
चरण में लोट रो पड़ूँगा
नया जन्म ना देना
हाथ मेरे जोड़ लूँगा

जो मुझको प्यार से
खिला पिला के पालते थे
और अंत में वही तो
छील मेरी खाल देते

व्यथा सुनाऊँगा
चरण में लोट रो पड़ूँगा
नया जन्म ना देना
हाथ मेरे जोड़ लूँगा

जो मुझको प्यार से
खिला पिला के पालते थे
और अंत में वही तो
छील मेरी खाल देते

शंकर पशुपति तू है
तू ही परम पिता है
देख तेरा प्राण
कैसे रोज चीखता है

ये तेरे प्रिय भोगते
जिस्म को ताजा मेरा
हाँ इनकी दावतों में
सज रहा जनाजा मेरा
इनकी दावतों में
सज रहा जनाजा मेरा

है आँखें बंद तो
परंतु जब भी वो जगा है
हुआ है खाक सब
अधर्म भी तबाह हुआ है
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं
तनोतु नः शिवः शिवम्

शिव शंभू, मैं इंतजार कर रहा हूँ
शिव शंभू, तेरे लिए मैं मर रहा हूँ
शिव शंभू, हाँ साथ ले चलो मुझे
अधर्मियों के बीच
वेदना से मैं गुजर रहा हूँ

शिव शंभू, जमीं प्रलय की ओर मोड़े
शिव शंभू, पाखंडियों की खाल ओढ़े
शिव शंभू, दशानन लंकापति का
अहंकार अभिमान
एक चरण की थाप तोड़े

प्रतिशोध की जलेगी आग
नृत्य हो प्रतिकार का
हाँ कष्ट से उबार
स्वप्न पूर्ण हो निखार का

विनाश कर दो शंभुनाथ
छोड़ दो सभी का साथ
उबाल दो ये सरजमीं
त्रिनेत्र खोल दो विराट

नर्क में जलेंगे
जिस तरह मुझे जलाया था
नोच जायेंगे
जिन्होंने मांस मेरा खाया था
कुम्भी पाक में
शरीर खौल के पकाएंगे
भोगते थे जो मुझे
हाँ वो भी भोगे जाएंगे

कहती दुनिया सारी
शंभू शिव बड़े हैं भोले
मय मदिरा भांग
पाप सारे शिव पे ढोले
विनाशकारी शंभु
नेत्र त्रिनेत्र जब है खोले
बरसी अग्नि
अत्याचारी झुलसे बन के शोले

थी आँखें बंद तो
परंतु शंभू अब जगा है
हाँ सर्वनाश करने
वीरभद्र खुद चला है
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं
तनोतु नः शिवः शिवम्

शिव शंभू, मैं इंतजार कर रहा हूँ
शिव शंभू, तेरे लिए मैं मर रहा हूँ
शिव शंभू, हाँ साथ ले चलो मुझे
अधर्मियों के बीच
वेदना से मैं गुजर रहा हूँ

शिव शंभू, जमीं प्रलय की ओर मोड़े
शिव शंभू, पाखंडियों की खाल ओढ़े
शिव शंभू, दशानन लंकापति का
अहंकार अभिमान
एक चरण की थाप तोड़े

शिव शंभू... शिव शंभू....!

गीतकार: निखर जुनेजा


About Shankar Pashupati Tu Hai (शंकर पशुपति तू है) Song

यह गाना "शंकर पशुपति तू है" एक शक्तिशाली भक्ति और प्रतिशोध से भरा हुए गीत है, जिसे Nikhar Juneja ने गाया, लिखा और कम्पोज़ किया है, यह गीत भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें यहाँ शंकर, पशुपति और शंभू कहा गया है, गीत की शुरुआत एक भक्त की पुकार से होती है, जो शिव से प्रार्थना करता है कि वे उस पर सवार हो जाएँ, उसे भभकती आग में तपा कर अपना भोग बना लें, यह एक गहन समर्पण और दर्द को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपने इस जन्म के दर्दनाक अंत की बात करता है और वापस उस स्थान पर लौटना चाहता है जहाँ आदि और अनंत है।

गीत में एक तीव्र प्रतिशोध और न्याय की भावना है, जहाँ भक्त कहता है कि जब शिव की आँखें खुलेंगी तो पूरा जहान काँप उठेगा, पाखंडियों के दुष्कर्मों का दंड मृत्यु होगा, और जो लोग उसकी चीखों से तृप्त हो रहे थे, उन सभी का अंत होगा, गीत में शिव के चंड तांडव नृत्य और "डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद" जैसे शब्दों से उनकी विनाशलीला का वर्णन है, भक्त खुद को अधर्मियों के बीच वेदना से गुजरता हुआ बताता है और शिव से प्रार्थना करता है कि वे पृथ्वी को प्रलय की ओर मोड़ें, पाखंडियों की खाल ओढ़ें और रावण जैसे अहंकार को अपने एक चरण से तोड़ दें।

गीत के अंतिम भाग में प्रतिशोध की आग और न्याय की कामना प्रबल हो उठती है, भक्त कहता है कि जिन लोगों ने उसे प्यार से पाला और अंत में उसकी खाल छीली, उन्हें नर्क में जलना होगा, शिव को भोला कहने वाली दुनिया को यह याद दिलाया जाता है कि जब शिव का त्रिनेत्र खुलता है तो अग्नि बरसती है और अत्याचारी झुलस जाते हैं, गीत "शिव शंभू" के जयकारे और तांडव के नाद के साथ समाप्त होता है, यह गीत भक्ति, दर्द, आस्था और दैवीय न्याय की एक तीव्र भावनात्मक यात्रा प्रस्तुत करता है।