मेरी सांसें के गहरे और भावुक बोल – Aditya Rikhari और Rauhan Malik की आवाज़ में प्यार, इबादत और बिछड़ने का दर्द। साँसें तेरा हँसना, तेरी साँसें दुआ – प्रेम की आध्यात्मिक यात्रा। पढ़ें पूरे लिरिक्स और खो जाएँ।
Meri Saansein Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (मेरी सांसें)
सात सुरों में कैसे कह दूँ
ये नज़्में सारी
जाम को छोड़ो,
थोड़ी आँखें तो चखो ना साक़ी
घड़ी के काँटे खड़े-खड़े ताकें,
कुछ कहो ना
काफ़ी समय से सब थमा है,
काफ़ी बातें बाकी
आँखें, तेरा चेहरा, बस इतनी दुआ
जी भर के जी में भर लूँ
आये चैन ज़रा
मेरी साँसें, तेरा हँसना
तेरी साँसें, दुआ
शामों की ये कहानी
अश्क मिलते सुबह
बस इबादत है बाकी
तेरी चौखट पे मैं
तेरा इश्क़ है फ़हाशी
मेरा इश्क़ ख़ुदा
सज़ा-ए-इश्क़ ही सजाए ख़ौफ़
ख़फ़ा है जिस्म कि कब आए फ़ौत
ना असरमंद कोई दवा
कि अब वो आए भी तो जाए लौट
कहाँ रखूँ गुलाब ये
कब्रों पर काँटे रहते हैं
तुम आए ही नहीं कब से
हम बचाकर अश्क भी बैठे हैं
ना लाज़िमी लगता अब ये
उम्रों का बढ़ते रहना
तेरे बिन अपनी मौत की
फैलाकर ख़बर भी बैठे हैं
आँखें, तेरा चेहरा, बस इतनी दुआ
जी भर के जी में भर लूँ
आये चैन ज़रा
मेरी साँसें, तेरा हँसना
तेरी साँसें, दुआ
शामों की ये कहानी
अश्क मिलते सुबह
बस इबादत है बाकी
तेरी चौखट पे मैं
तेरा इश्क़ है फ़हाशी
मेरा इश्क़ ख़ुदा
मेरी साँसें, तेरा हँसना
तेरी साँसें, दुआ
शामों की ये कहानी
अश्क मिलते सुबह
बस इबादत है बाकी
तेरी चौखट पे मैं
तेरा इश्क़ है फ़हाशी
मेरा इश्क़ ख़ुदा...!
👉 In Romanized - Meri Saansein Lyrics
गीतकार: रावेटर, अंशफॉरश्योर
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About Meri Saansein (मेरी सांसें) Song
यहाँ "मेरी साँसें" गाने के बोल पेज की जानकारी दी जा रही है। यह गाना Aditya Rikhari और Rauhan Malik ने गाया है, जबकि इसके संगीतकार और गीतकार Ravator और Ansh4sure हैं। Music Producer Ravator हैं और इसे Universal Music Group लेबल पर रिलीज़ किया गया है। गाने की शुरुआत "सात सुरों में कैसे कह दूँ, ये नज़्में सारी" से होती है, जो सीधे दिल को छूने वाली है। बोल में प्यार, बिछड़ने का दर्द और इबादत जैसे भाव हैं, जैसे "आँखें, तेरा चेहरा, बस इतनी दुआ" में एक सादगी से ईश्वर से प्रार्थना की गई है।
दूसरे हिस्से में, "मेरी साँसें, तेरा हँसना" और "तेरी साँसें, दुआ" जैसे लाइनों से पता चलता है कि गाने का विषय प्रेमी के हर पल को साँसों और दुआओं से जोड़ता है। "शामों की ये कहानी, अश्क मिलते सुबह" में रात से सुबह तक के आँसुओं की कहानी है, और "बस इबादत है बाकी, तेरी चौखट पे मैं" में साफ है कि यह प्रेम एक आध्यात्मिक स्तर तक पहुँच गया है। तीसरे हिस्से में "सज़ा-ए-इश्क़ ही सजाए ख़ौफ़" और "कहाँ रखूँ गुलाब ये, कब्रों पर काँटे रहते हैं" जैसी लाइनें दर्द और मौत के विचार को गहराई से दिखाती हैं। कुल मिलाकर, यह गीत प्रेम के कच्चे और गहरे रूप को सादे शब्दों में पेश करता है, जहाँ साँसें ही सब कुछ हैं।