अब छलकते हुए लिरिक्स (Ab Chhalakte Hue Lyrics in Hindi) – Hariharan, Prithvi Gandharv | Salim Sulaiman Music

अब छलकते हुए के बोल | Hariharan और Prithvi Gandharv की मधुर आवाज़। Salim Sulaiman के संगीत में यह सूफ़ी गीत दिल की गहराइयों तक उतर जाता है। पूरे लिरिक्स पढ़ें।

Ab Chhalakte Hue Song Poster from Salim Sulaiman Music

Ab Chhalakte Hue Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (अब छलकते हुए)

अब छलकते हुए, सागर नहीं
देखे जाते
अब छलकते हुए, सागर नहीं
देखे जाते

तौबा के बाद ये मंज़र
तौबा के बाद ये मंज़र नहीं
देखे जाते…
अब छलकते हुए

अब छलकते हुए सागर नहीं
देखे जाते
तौबा के बाद ये मंज़र नहीं
देखे जाते…
अब छलकते हुए

गा मा पा नि सा
गा रे नि सा
नि पा मा’ मा
गा नि पा
नि पा नि मा पा
नि नि पा

नि नि पा
मा पा नि
मा नि नि पा
मा पा गा, सा नि
पा नि सा गा
नि सा गा मा पा नि
पा सा नि पा मा गा…

पा नि सा गा सा… आलाप

मा गा सा नि सा
पा नि सा गा मा पा गा मा नि पा
नि नि पा नि
मा पा, मा पा नि नि पा नि
मा पा गा मा
नि नि पा मा गा पा मा

गा गा सा नि सा (×2)
गा गा सा नि सा गा मा पा गा मा पा
पा नि नि पा नि पा
नि नि पा नि पा मा गा
गा मा पा नि सा गा रे
नि रे पा मा धा नि सा नि पा
गा मा गा सा

मस्त कर के मुझे औरों को
मुँह लगा साक़ी
मस्त कर के…

मस्त कर के मुझे औरों को
मुँह लगा साक़ी
ये सितम होश में रह कर नहीं
देखे जाते…
अब छलकते.. आ.. अब छलकते..

गा मा पा नि सा गा रे, नि रे सा
पा सा नि पा, मा नि पा मा
गा पा मा, गा मा गा सा नि सा
अब छलकते.. आ.. अब छलकते..

हमने देखा है ज़माने का
बदलना लेकिन
हमने देखा है
ज़माने का
बदलना लेकिन
उनके बदले हुए तेवर नहीं
देखे जाते…
अब छलकते हुए

छलकते हुए नहीं जाते
छलकते हुए सागर
छलकते हुए सागर नहीं देखे
सागर नहीं देखे
जाते, जाते
अब छलकते…

👉 In Romanized - Ab Chhalakte Hue Lyrics

गीतकार: अली अहमद जलिली


About Ab Chhalakte Hue (अब छलकते हुए) Song

यह गाना "अब छलकते हुए" एक गहरी भावनात्मक और सुरीली रचना है, जिसे Prithvi Gandharv ने compose किया है और Salim Sulaiman ने arrange व produce किया है, गायक Hariharan और Prithvi Gandharv ने अपनी मधुर आवाज़ से इसे सजाया है, जबकि lyrics Ali Ahmad Jalili द्वारा लिखे गए हैं, यह गाना Merchant Records के तहत release हुआ है। 

इसके बोल "अब छलकते हुए, सागर नहीं देखे जाते" एक दर्दभरी कहानी कहते हैं, जैसे कोई समंदर अब उमड़ता नहीं दिखता, या "तौबा के बाद ये मंज़र नहीं देखे जाते" यानी पश्चाताप के बाद का नज़ारा भी बदल गया है, फिर "मस्त कर के मुझे औरों को मुँह लगा साक़ी" जैसी पंक्तियाँ मोहब्बत और ज़िंदगी के उलझे हुए एहसास को दर्शाती हैं, गाने में "गा मा पा नि सा" जैसे सुरों का खूबसूरत इस्तेमाल हुआ है, जो classical music की झलक देते हैं। 

आखिरी हिस्से में "हमने देखा है ज़माने का बदलना लेकिन उनके बदले हुए तेवर नहीं देखे जाते" जैसे बोल वक्त के साथ बदलाव पर सवाल उठाते हैं, और "छलकते हुए सागर नहीं देखे जाते" पर खत्म होते हैं, यह गाना अपनी melody और meaningful lyrics के कारण listeners को emotional journey पर ले जाता है, और music lovers के लिए एक यादगार experience है।