इलाही नूर लिरिक्स (Ilahi Noor Lyrics in Hindi) – Abida Parveen, Salim Merchant | Salim Sulaiman Music

इलाही नूर के लिरिक्स | Abida Parveen और Salim Merchant की पवित्र आवाज़ में रूहानी भजन। Amitabh Bhattacharya के गहरे बोल। ईश्वर के दिव्य प्रकाश की खोज।

Ilahi Noor Song Poster from Salim Sulaiman Music

Ilahi Noor Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (इलाही नूर)

नूर-ए-इलाही, 
नूर-ए-इलाही, इलाही 

नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 

हो मेरे मौला दुआ दिल से है आई 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
हो जी मौला दिखा तेरी रौनाई 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 

हो मेरी हस्ती है दिन चार की 
फ़ानी मेरा वजूद है 
हो मेरी हस्ती है दिन चार की 
फ़ानी मेरा वजूद है 

तू अव्वल, तू ही आख़िर 
बस तू ही तू मौजूद है 
हो जी मौला... 
हो जी मौला तू रहबर मैं हूँ राही 

नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
हो जी मौला दिखा तेरी रौनाई 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 

मेरी ख़ुदगर्ज़ियों ख़ताओं को 
माफ़ कर ज़रा 
मेरी ख़ुदगर्ज़ियों ख़ताओं को 
माफ़ कर ज़रा 
दामन में है दाग़ फिर से 
शफ़्फ़ाफ़ कर ज़रा 
दामन में है दाग़ फिर से 
शफ़्फ़ाफ़ कर ज़रा 
दे दे दाख़िला तेरे घर में 
दे दे दाख़िला तेरे घर में 
तुझसे मांगता हूँ इतना ही 
इतना ही इतना ही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 

नूर-ए-इलाही, इलाही, इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही 
नूर-ए-इलाही, नूर-ए-इलाही

👉 In Romanized - Ilahi Noor Lyrics

गीतकार: अमिताभ भट्टाचार्य


About Ilahi Noor (इलाही नूर) Song

यह गाना "इलाही नूर" एक spiritual और devotional composition है, जिसमें divine light और ईश्वर की शरण की भावना को express किया गया है, music composed और produced किया गया है Salim–Sulaiman द्वारा, और इसे गाया है legendary singer Abida Parveen और Salim Merchant ने, lyrics लिखे हैं Amitabh Bhattacharya ने, और additional music production किया है Raj Pandit ने, यह गाना Salim Sulaiman Music label के under release हुआ है।

गाने की lyrics शुरू होती हैं "नूर-ए-इलाही" के repetition से, जो divine light को represent करता है, फिर आता है एक heartfelt plea, "मेरे मौला दुआ दिल से है आई", यानी ईश्वर से एक sincere prayer, और "दिखा तेरी रौनाई" यानी उनकी divine glow को देखने की इच्छा, इसके बाद lyrics human existence की temporary nature पर focus करती हैं, "मेरी हस्ती है दिन चार की, फ़ानी मेरा वजूद है", यह बताता है कि मानव जीवन क्षणभंगुर है और केवल ईश्वर ही eternal और present है, "तू अव्वल, तू ही आख़िर, बस तू ही तू मौजूद है"।

अगले भाग में, singer अपनी shortcomings और selfish desires के लिए forgiveness मांगता है, "मेरी ख़ुदगर्ज़ियों ख़ताओं को माफ़ कर ज़रा", और purity की request करता है, "दामन में है दाग़ फिर से शफ़्फ़ाफ़ कर ज़रा", अंत में, एक humble appeal है ईश्वर के घर में entry पाने की, "दे दे दाख़िला तेरे घर में", और यह कहता है कि singer बस इतना ही मांगता है, गाना फिर से "नूर-ए-इलाही" के powerful repetition के साथ समाप्त होता है, जो listener के mind और heart पर एक lasting impression छोड़ता है, overall, यह गाना devotion, surrender, और spiritual longing की beautiful expression है।