जश्न-ए-अली लिरिक्स (Jashn E Ali Lyrics in Hindi) – Salim Merchant | Salim Sulaiman Music

जश्न-ए-अली के भक्तिपूर्ण बोल | Salim Merchant की मार्मिक आवाज़ में ग़दीर-ए-खुम्म का जश्न। सलीम-सुलेमान का संगीत और फातिमा मीठा के गहरे लिरिक्स। पढ़ें और महसूस करें।

Jashn E Ali Song Poster from Salim Sulaiman Music

Jashn E Ali Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (जश्न-ए-अली)

मन कुंतो मौला फ़-हाज़ा अलीयुन मौला 

ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली 
ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली 

आओ हम मिलके मनाएं 
यहाँ जश्न-ए-अली 
आओ हम मिलके मनाएं 
यहाँ जश्न-ए-अली 
ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली 
ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली 

रसूल-उल-अल्लाह ने फरमाया 
मन कुन्तो मौला 
रसूल-उल-अल्लाह ने फरमाया 
मन कुन्तो मौला 

जिसका का मैं हूँ मौला, 
उसका अली मौला 
ग़दीर-ए-खुम्म में... 
ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली 
ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली 

तमाम हाजियों ने की 
वहाँ बैअत-ए-अली 
तमाम हाजियों ने की 
वहाँ बैअत-ए-अली 

ईद-ए-ग़दीर आई है, 
आओ करें ज़िक्र-ए-अली 
ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली 
ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली 

आओ हम मिलके मनाएं... 
आओ हम मिलके मनाएं 
यहाँ जश्न-ए-अली 
आओ हम मिलके मनाएं 
यहाँ जश्न-ए-अली 

ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली 
ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली

👉 In Romanized - Jashn E Ali Lyrics

गीतकार: फातिमा मिथा


About Jashn E Ali (जश्न-ए-अली) Song

यह गाना "जश्न-ए-अली" एक भक्तिपूर्ण और उत्सवधर्मी नज़्म है, जो ग़दीर-ए-खुम्म के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को समर्पित है, यह गाना Salim Sulaiman द्वारा composed और produced किया गया है, और इसे Salim Merchant ने अपनी मार्मिक आवाज़ में गाया है, lyrics Fatima Mitha द्वारा लिखे गए हैं, जो ग़दीर के दिन हज़रत अली (अ.स.) को मौला घोषित किए जाने की घटना और ख़ुशी के जश्न को दर्शाते हैं, backing vocals में Manish Sharma, Vaibhav Rajvarsh, Diptanshu Tiwari और Shivansh Jindal का योगदान है, और यह गाना Merchant Records के तहत release हुआ है।

गाने के बोल "मन कुंतो मौला फ़-हाज़ा अलीयुन मौला" से शुरू होते हैं, जो एक प्रसिद्ध हदीस को दर्शाते हैं, जिसमें पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) ने फरमाया था कि जिसका मैं मौला हूँ, उसका अली मौला है, गाना इसी ऐतिहासिक घोषणा और उसके बाद हज़रत अली (अ.स.) को वली यानी अभिभावक के रूप में स्वीकार किए जाने की ख़ुशी में मनाए जाने वाले जश्न को दर्शाता है, बार-बार दोहराया जाने वाला मुखड़ा "ग़दीर-ए-खुम्म में वली बने मौला अली" इसी केंद्रीय विचार को मज़बूती से सामने लाता है।

गाने में सभी को एक साथ आकर "जश्न-ए-अली" मनाने का आह्वान किया गया है, और ईद-ए-ग़दीर के आगमन पर हज़रत अली (अ.स.) के ज़िक्र यानी स्मरण को प्रोत्साहित किया गया है, यह गाना अपनी धुन और भावनात्मक गायन के साथ श्रोता के मन में भक्ति और आनंद की भावना जगाता है, और ग़दीर के पवित्र दिन के महत्व को एक सुंदर संगीतमय रूप में पेश करता है।