शाम आई लिरिक्स (Shaam Aayi Lyrics in Hindi) – Sharayu Date | Salim Sulaiman Music

शाम आई के लिरिक्स – Sharayu Date की मधुर आवाज़ में एक विरह भरा गीत। बादल छाए, बालम ना आए – प्रतीक्षा और उदासी का मार्मिक चित्रण।

Shaam Aayi Song Poster from Salim Sulaiman Music

Shaam Aayi Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (शाम आई)

शाम आई, मेघ छाए, 
का करूँ? बालम ना आए। 
शाम आई, मेघ छाए, 
का करूँ? बालम ना आए। 

जिया कहीं लागे नाहीं, 
बहु विपदा हाय… 
बहु विपदा हाय… 
शाम आई, मेघ छाए, 
का करूँ? बालम ना आए। 
शाम आई... 

छाई घटा घनघोर सी बिजुरी, 
छाई घटा... 
छाई घटा घनघोर सी बिजुरी, 
मयूर नृत्यत देखन वो कजरी। 
मयूर नृत्यत देखन वो कजरी। 

चित्र विभोर भवतल भर जाए, 
चित्र विभोर भवतल भर जाए, 
नित मनोहर मन पल ना भाए… 

शाम आई, मेघ छाए, 
का करूँ? बालम ना आए, 
शाम आई, मेघ छाए, 
का करूँ? बालम ना आए…!

👉 In Romanized - Shaam Aayi Lyrics

गीतकार: योगेश सावे


About Shaam Aayi (शाम आई) Song

यह एक बहुत ही सुंदर गीत है, जिसका नाम "शाम आई" (Shaam Aayi) है। इस गीत को Sharayu Date ने गाया है, और इसके बोल Yogesh Save ने लिखे हैं। संगीत Tanmay Bhave द्वारा तैयार किया गया है, और इसे Ajay Kesbhat ने produce किया है। यह गीत Merchant Records के अंतर्गत जारी किया गया है।

गीत की शुरुआत "शाम आई, मेघ छाए, का करूँ? बालम ना आए" से होती है, जो एक स्त्री की भावनाओं को दर्शाती है, जिसे शाम के समय बादल छा जाने पर भी अपने प्रियतम का इंतज़ार है, और वह उदास है क्योंकि वह नहीं आया। फिर गीत में "जिया कहीं लागे नाहीं, बहु विपदा हाय" जैसे बोल आते हैं, जो दर्शाते हैं कि उसका मन कहीं नहीं लग रहा और वह बहुत परेशानी महसूस कर रही है।

आगे के बोल "छाई घटा घनघोर सी बिजुरी, मयूर नृत्यत देखन वो कजरी" प्रकृति का सुंदर चित्रण करते हैं, जहाँ घने बादल और बिजली चमक रही है, और मोर नाच रहे हैं। लेकिन "चित्र विभोर भवतल भर जाए, नित मनोहर मन पल ना भाए" यह दिखाता है कि इतनी सुंदरता के बावजूद, उसका मन अशांत है और उसे सुख नहीं मिल रहा। अंत में गीत फिर से उसी उदासी के साथ "शाम आई, मेघ छाए, का करूँ? बालम ना आए" पर वापस आता है, जो प्रतीक्षा और विरह की भावना को मजबूती से व्यक्त करता है।