श्रृंगार लिरिक्स (Shringaar Lyrics in Hindi) – Shankar Mahadevan | Salim Sulaiman Music

श्रृंगार के लिरिक्स – Shankar Mahadevan की दिव्य आवाज़ में Salim Sulaiman का भक्ति और विरह से सराबोर गीत। "काहे करे श्रृंगार सजनिया" के बोल।

Shringaar Song Poster from Salim Sulaiman Music

Shringaar Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (श्रृंगार)

“Without love, without music, without harmony, 
We are nothing” 
-⁠ ⁠Ustad Zakir Hussain 

काहे करे श्रृंगार सजनिया 
काहे करे श्रृंगार सजनिया 
जग तोपे जाए वार सजनिया 
जग तोपे जाए वार सजनिया 

सबसे सुंदर नार सजनिया 
काहे करे श्रृंगार सजनिया 
काहे करे श्रृंगार.... 

हाँ… 
चंचल नैनों से मुस्काए 
पिया से मिलन काहे नहीं आए 
दरस दिखा के काहे सताए 
रतियाँ सारी बीती जाए 
तोसे मैं मानूँ हार सजनिया… 

काहे करे श्रृंगार सजनिया 
काहे करे श्रृंगार... 
सजनिया… सजनिया… 

“Knowledge is like a fast flowing river. There’s a river of knowledge; passes through a teacher, a guru, a friend, a mentor. And, it’s upto the student to be able to get a cup out of that river, a bucket or a truck load out of that river. It’s upto the student” 
⁠-⁠ ⁠Ustad Zakir Hussain 

सजनिया… काहे करे श्रृंगार... 
काहे करे श्रृंगार... काहे करे श्रृंगार... 
काहे करे श्रृंगार... 

काहे करे श्रृंगार सजनिया 
काहे करे श्रृंगार... श्रृंगार... 

काहे करे श्रृंगार... 

काहे करे, काहे करे श्रृंगार... 
सजनिया… सजनिया…!

👉 In Romanized - Shringaar Lyrics

गीतकार: श्रद्धा पंडित


About Shringaar (श्रृंगार) Song

यह गाना "श्रृंगार" है, जो Bhoomi 2025 का हिस्सा है, और इसे प्रसिद्ध संगीतकार Salim Sulaiman ने बनाया है, जबकि गायक हैं Shankar Mahadevan, और गीत लिखे हैं Shraddha Pandit ने, साथ ही इसमें Ustad Zakir Hussain का एक विचार भी शामिल है, जो कहता है कि "बिना प्यार, बिना संगीत, बिना तालमेल, हम कुछ भी नहीं हैं", यह गाना एक स्त्री की भावनाओं को दर्शाता है, जो अपने प्रिय से मिलन की इच्छा रखती है, और वह पूछती है कि अगर प्रिय मिले ही नहीं, तो श्रृंगार यानी सजावट का क्या औचित्य है, गीत की पंक्तियाँ जैसे "काहे करे श्रृंगार सजनिया, जग तोपे जाए वार सजनिया" में एक गहरी उदासी और प्रतीक्षा की भावना है।

गीत के बोल बहुत ही मार्मिक हैं, जैसे "चंचल नैनों से मुस्काए, पिया से मिलन काहे नहीं आए", जो एकात्मकता और विरह की पीड़ा को दिखाते हैं, साथ ही, Ustad Zakir Hussain का एक और संदेश भी इसमें जोड़ा गया है, जहाँ वे ज्ञान की तुलना एक बहती नदी से करते हैं, और कहते हैं कि यह छात्र पर निर्भर करता है कि वह उस नदी से कितना ज्ञान ले पाता है, यह गाना न सिर्फ प्यार और विरह के भाव लिए है, बल्कि जीवन के गहरे सबक भी सिखाता है।

अंत में, यह गाना Merchant Records द्वारा जारी किया गया है, और इसमें संगीत के सह-निर्माता हैं Raj Pandit, यह एक ऐसी रचना है जो शास्त्रीय और आधुनिक संगीत का सुंदर मेल प्रस्तुत करती है, और श्रोता को भावनात्मक रूप से जोड़ती है, गीत की आवृत्ति "काहे करे श्रृंगार" बार-बार दोहराई गई है, जो गाने के मुख्य भाव को और गहरा बनाती है, और इसे एक यादगार बनाती है।