सुकून 2.0 लिरिक्स (Sukoon 2.0 Lyrics in Hindi) – Arijit Singh | Salim Sulaiman Music

सुकून 2.0 के लिरिक्स – Arijit Singh के स्वरों में। यह आत्म-खोज का गीत सिखाता है कि असली शांति हमारे अपने भीतर ही छुपी है। Salim Sulaiman का संगीत।

Sukoon 2.0 Song Poster from Salim Sulaiman Music

Sukoon 2.0 Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (सुकून 2.0)

दिल वोही सुकून ढूँढे
वैसा ही क़रार माँगे
दिल वही सुकून ढूँढे
वैसा ही क़रार माँगे

जो क़ुदरत ने बिखेरे थे
बस मेरी राहों में
और क़िस्मत ने सजाए थे
मेरी निगाहों में

जाने अब कहाँ मिलेगा?
कहाँ छुपा होगा?
मिल जाता तो रख लेता मैं
अपनी पनाहों में

वो सुकून शायद मुझसे ही है
मुझ में ही था और मुझ में ही है

(सुकून.. सुकून.. सुकून..)

झाँक लूँ ख़ुद में ज़रा,
सब कुछ है अंदर मेरे
लहरों पे मिलता नहीं,
जो गहरे समंदर मिले

महसूस होगा मुझे,
जब ख़ुद को पहचानूँगा
दिल के अंदर देख कर,
अपनी रूह को जानूँगा

डूबेगा… डूबेगा…

डूबेगा तो तर जाएगा
हर ज़र्रा मेरा
वरना तड़प के ही गुज़रेगा
रोज़-मर्रा मेरा

क्या मैंने कभी किया है?
थोड़ा इश्क़ भी ख़ुद से
मिल जाएगा फिर जो ढूँढता हूँ
मैं दर-ब-दर कब से

वो सुकून शायद मुझसे ही है
मुझ में ही था और मुझ में ही है
वो सुकून शायद मुझसे ही है
मुझ में ही था और मुझ में ही है
(सुकून.. सुकून.. सुकून..)

(सुकून.. सुकून.. सुकून..)
(सुकून.. सुकून.. सुकून..)

👉 In English - Sukoon 2.0 Lyrics

गीतकार: श्रद्धा पंडित


About Sukoon 2.0 (सुकून 2.0) Song

यह गाना "Sukoon 2.0" है, जिसे Salim Sulaiman ने compose और produce किया है, और इसे Arijit Singh ने गाया है, lyrics Shraddha Pandit द्वारा लिखे गए हैं, यह गाना Salim Sulaiman Music पर उपलब्ध है। 
इस गाने की lyrics बहुत गहरी और सोचने पर मजबूर करने वाली हैं, यह गाना सुकून यानी शांति की तलाश के बारे में है, lyrics कहती हैं कि दिल वही सुकून ढूंढता है और वैसा ही करार मांगता है, जो कुदरत ने बिखेरे थे बस मेरी राहों में, और किस्मत ने सजाए थे मेरी निगाहों में, फिर lyrics पूछती हैं कि यह सुकून अब कहाँ मिलेगा, कहाँ छुपा होगा, अगर मिल जाता तो मैं इसे अपनी पनाहों में रख लेता। 

गाने का मुख्य विचार यह है कि सुकून शायद मुझसे ही है, मुझमें ही था और मुझमें ही है, lyrics कहती हैं कि अगर मैं खुद में झांकूं तो पाऊंगा कि सब कुछ मेरे अंदर ही है, जो चीजें लहरों पर नहीं मिलतीं वो गहरे समंदर में मिलती हैं, यानी शांति बाहर नहीं, अपने अंदर ढूंढनी चाहिए, जब मैं खुद को पहचानूंगा, दिल के अंदर देखूंगा, अपनी रूह को जानूंगा, तभी महसूस होगा। 

आखिरी भाग में lyrics कहती हैं कि अगर डूबेंगे तो तर जाएंगे, हर जर्रा मेरा, वरना तड़प के ही गुजरेगा रोज-मर्रा मेरा, यह पूछती हैं कि क्या मैंने कभी खुद से थोड़ा इश्क भी किया है, अगर करूं तो वो सुकून मिल जाएगा जो मैं दर-ब-दर ढूंढ रहा हूं, और फिर दोहराती हैं कि वो सुकून शायद मुझसे ही है, मुझमें ही था और मुझमें ही है, यह गाना एक तरह से आत्म-खोज और आत्म-स्वीकार का संदेश देता है, जो हर किसी के लिए प्रासंगिक है।