सुकून के बोल | Raj Pandit की सुरीली आवाज़ में वो सुकून तलाशता गीत। Salim Sulaiman के संगीत में छिपा है असली सुकून अपने अंदर। लिरिक्स पढ़ें।
Sukoon - Rewind Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (सुकून)
दिल वही सुकून ढूंढे
वैसा ही क़रार मांगे
दिल वही सुकून ढूंढे
वैसा ही क़रार मांगे
जो कुदरत ने बिखेरे थे
बस मेरी राहों में
और क़िस्मत ने सजाए थे
मेरी निगाहों में
जाने अब कहाँ मिलेगा?
कहाँ छुपा होगा?
मिल जाता तो रख लेता मैं
अपनी पनाहों में
वो सुकून शायद मुझसे ही है
मुझ में ही था और मुझ में ही है
झाँक लूँ खुद में ज़रा,
सब कुछ है अंदर मेरे
लहरों पे मिलता नहीं,
जो गहरे समंदर मिले
महसूस होगा मुझे,
जब खुद को पहचानूंगा
दिल के अंदर देख कर,
अपनी रूह को जानूंगा
डूबेगा… डूबेगा…
डूबेगा तो तर जाएगा
हर ज़र्रा मेरा
वरना तड़प के ही गुज़रेगा
रोज़मर्रा मेरा
क्या मैंने कभी किया है?
थोड़ा इश्क़ भी खुद से
मिल जाएगा फिर जो ढूंढता हूँ
मैं दरबदर कब से
वो सुकून शायद मुझसे ही है
मुझ में ही था और मुझ में ही है
वो सुकून शायद मुझसे ही है
मुझ में ही था और मुझ में ही है
सुकून… सुकून… सुकून…
सुकून…
वो सुकून मुझसे है…
सुकून…
मुझ में है सुकून…
सुकून… सुकून… सुकून…
👉 In Romanized - Sukoon - Rewind Lyrics
गीतकार: श्रद्धा पंडित
About Sukoon - Rewind (सुकून) Song
यह गाना "सुकून (Rewind)" एक बहुत ही गहरा और विचारपूर्ण गीत है, जो अपने शीर्षक की तरह ही मन को शांति और तलाश का एहसास दिलाता है। इसे Salim Sulaiman ने compose और produce किया है, और इसे Raj Pandit ने गाया है, जबकि lyrics Shraddha Pandit द्वारा लिखे गए हैं, और यह Merchant Records के तहत release हुआ है। गाने के बोल "दिल वही सुकून ढूंढे, वैसा ही क़रार मांगे" से शुरू होते हैं, जो दिल की उस गहरी चाहत को दिखाते हैं, जो प्रकृति (कुदरत) और भाग्य (क़िस्मत) द्वारा बिखेरी गई चीज़ों को फिर से पाना चाहता है, लेकिन अब वह सुकून कहीं खो सा गया लगता है, और गीत में सवाल उठता है कि "जाने अब कहाँ मिलेगा, कहाँ छुपा होगा?"।
गाना आगे बढ़ता है और एक महत्वपूर्ण संदेश देता है, कि शायद यह सुकून हमेशा से हमारे अंदर ही था, जैसे कि लाइन "वो सुकून शायद मुझसे ही है, मुझ में ही था और मुझ में ही है" में कहा गया है। यह हमें खुद के अंदर झाँकने, अपनी आत्मा (रूह) को पहचानने की सलाह देता है, क्योंकि सच्चा सुकून बाहरी दुनिया की लहरों में नहीं, बल्कि अपने गहरे समंदर जैसे अंदर छिपा होता है, और जब हम खुद को जानेंगे, तभी इसे महसूस कर पाएंगे।
अंत में, गाना एक प्रेरणादायक विचार देता है, कि कभी-कभी डूबना (डूबेगा) ही तैरना सिखाता है, और अगर हम खुद से प्यार (इश्क़) नहीं करेंगे, तो हमारा रोज़मर्रा का जीवन तड़पता रहेगा। यह गीत हमें याद दिलाता है कि जिस सुकून की हम बाहर तलाश में भटक रहे हैं, वह शायद हमारे अपने अंदर ही मौजूद है, बस हमें खुद को पहचानने और स्वीकार करने की ज़रूरत है, और यह संदेश गाने के आखिरी हिस्से में "सुकून… मुझ में है सुकून" के रिपीट होते हुए शब्दों के साथ और भी मजबूती से उभरता है।