बिस्मिल्लाह लिरिक्स (Bismillah Lyrics in Hindi) – Rais Anis Sabri | Sunshine Music

बिस्मिल्लाह के भक्ति और प्रेम भरे बोल – Rais Anis Sabri की मधुर आवाज़ में सूफी रंग। मैनूं चढ़ेया इश्क दा रंग – पढ़ें लिरिक्स।

Bismillah Song Poster from Sunshine Music

Bismillah Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (बिस्मिल्लाह)

बिस्मिल्लाह, बिस्मिल्लाह, 
बिस्मिल्लाह... 
मैनूं चढ़ेया इश्क दा रंग, 
बिस्मिल्लाह, बिस्मिल्लाह॥ 

मैनूं चढ़ेया इश्क दा रंग, 
करां मैं बिस्मिल्लाह ॥ 
मैनूं चढ़ेया इश्क दा रंग, 
करां मैं बिस्मिल्लाह ॥ 

मेरी होर कोई ना मंग, 
करां मैं, (बिस्मिल्लाह) 
करां मैं, (बिस्मिल्लाह) 
करां मैं बिस्मिल्लाह, 
करां मैं बिस्मिल्लाह, 
करां मैं बिस्मिल्लाह 
करां मैं बिस्मिल्लाह ॥ 

मैनूं चढ़ेया इश्क दा रंग, 
करां मैं बिस्मिल्लाह ॥ 
मैनूं चढ़ेया इश्क दा रंग, 
करां मैं बिस्मिल्लाह ॥ 

मेरी होर कोई ना मंग, 
करां मैं बिस्मिल्लाह 
करां मैं बिस्मिल्लाह ॥ 

छड्ड दुनिया दे झगड़े-छेड़े, 
लड्ड लग गईयां सैयाँ तेरे ॥ 
बिस्मिल्लाह, बिस्मिल्लाह, 

छड्ड दुनिया दे झगड़े-छेड़े, 
लड्ड लग गईयां सैयाँ तेरे ॥ 
छड्ड दुनिया दे झगड़े-छेड़े, 
लड्ड लग गईयां सैयाँ तेरे ॥ 
लड्ड लग गईयां सैयाँ तेरे ॥ 
लड्ड लग गईयां सैयाँ तेरे ॥ 

सद्दा रहीं मेरे अंग-संग, 
मेरे साइयाँ... 
हो मेरे साइयाँ, हो मेरे साइयाँ.. 

सद्दा रहीं मेरे अंग-संग, 
करां मैं बिस्मिल्लाह, 
सद्दा रहीं मेरे अंग-संग, 
करां मैं बिस्मिल्लाह, 
मेरी होर कोई ना मंग, 
करां मैं, (बिस्मिल्लाह) 
करां मैं, (बिस्मिल्लाह) 
करां मैं बिस्मिल्लाह, 
करां मैं बिस्मिल्लाह, 
करां मैं बिस्मिल्लाह, 
करां मैं बिस्मिल्लाह ॥ 

बिस्मिल्लाह, बिस्मिल्लाह, 
बिस्मिल्लाह, बिस्मिल्लाह, 
बिस्मिल्लाह, बिस्मिल्लाह, 
बिस्मिल्लाह, बिस्मिल्लाह....!

👉 In Romanized - Bismillah Lyrics

गीतकार: अशोक शर्मा


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About Bismillah (बिस्मिल्लाह) Song

यहाँ "Bismillah" गीत के बोल और उसकी खूबसूरती के बारे में जानकारी दी गई है। यह गीत "बिस्मिल्लाह" एक भक्ति और प्रेम भरा गीत है, जिसे सिंगर Rais Anis Sabri ने अपनी मधुर आवाज़ में गाया है। इस गीत के कंपोज़र Jaspal Singh हैं, और लिरिक्स Ashok Sharma ने लिखे हैं। यह गीत Sunshine Music लेबल के तहत रिलीज़ हुआ है। गीत का मुख्य भाव "बिस्मिल्लाह" (अल्लाह के नाम से शुरू) के साथ इश्क (प्रेम) के रंग में डूबने का है। बोल कहते हैं कि 'मैनूं चढ़ेया इश्क दा रंग' यानी मुझ पर प्रेम का रंग चढ़ गया है, और मैं बार-बार 'बिस्मिल्लाह' कहता हूँ।

इस गीत में एक गहरी सूफी और भक्ति भावना है, जहां प्रेमी अपने सैयाँ (प्रभु या प्रेमी) के लिए दुनिया के झगड़े-छेड़े छोड़ देता है और केवल उसी के प्यार में लीन हो जाता है। बोल कहते हैं कि 'छड्ड दुनिया दे झगड़े-छेड़े, लड्ड लग गईयां सैयाँ तेरे' यानी दुनिया के सब झगड़े छोड़कर, मैं तेरे (सैयाँ) से लिपट गया हूँ। यह प्रेम और समर्पण का एक सुंदर चित्र है। साथ ही, "बिस्मिल्लाह" शब्द को हर लाइन में दोहराया गया है, जो गीत को एक पवित्र और ईश्वरीय रंग देता है। यह गीत उन लोगों के लिए खास है जो सूफी संगीत या भक्ति गीतों से जुड़ाव महसूस करते हैं।