मिर्ज़ा लिरिक्स (Mirza Lyrics in Hindi) – Playsid, Biswaa Deb | Sunshine Music

मिर्ज़ा के दर्द भरे बोल – Playsid और Biswaa Deb की आवाज़ में एक खोई हुई शहज़ादी की तलाश। मिर्ज़ा तेरा परेशान फिरे – पढ़ें लिरिक्स।

Mirza Song Poster from Sunshine Music

Mirza Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (मिर्ज़ा)

हाँ आ वो वो 
मिर्ज़ा तेरा, मिर्ज़ा मेरा, मिर्ज़ा तेरा 

हसीना सी थी एक शहज़ादी 
जिसपे था मैं फ़िदा बेइंतहा 
वो मेरी पूरी दुनिया थी 
मैं उसका पूरा आशियाँ 

पर हमसे हो गई नादानी 
ज़रा बेपरवाही 
वफ़ाई वाली गाड़ी मैंने खंभे में भिड़ा दी 
बेबी, आइ’म स्वेयरिंग दैट आइ’म सॉरी 
यूँ गुमशुदा हुई कि फिर कभी न लौटी 
उसे बता दो ऐ शहज़ादी 

मिर्ज़ा तेरा परेशान फिरे यहाँ-वहाँ 
तो लौट आ ले बचा 
इक दफ़ा, इक दफ़ा, इक दफ़ा 

मिर्ज़ा तेरा तुझे खोजता है हर जगह 
तो लौट आ ले बचा 
इक दफ़ा, इक दफ़ा, इक दफ़ा 

ये ख़्वाहिशें 
बड़ी मतलबी हैं, बनाती हमें 
कभी भी किसी की क़दर ना करें 
फ़िक्र ना करें 

थी गलती मेरी 
मैं जाने-अनजाने में गुम सी गई 
तलाश-ए-सुकून में यूँ घुल सी गई 
कि मुड़ ना सकी कभी 

पर हमसे हो गई ख़ता 
भागी-भागी गली-गली 
अभी मिले ना दिशा 
जीना ज़िंदगी तेरे बिना है 
लगती फ़रियाद 
नहीं ढलती तेरी आस, मिर्ज़ा 
मेरे, तू है कहाँ 

मिर्ज़ा तेरा परेशान फिरे यहाँ-वहाँ 
तो लौट आ ले बचा 
इक दफ़ा, इक दफ़ा, इक दफ़ा 
मिर्ज़ा तेरा तुझे खोजता है हर जगह 
तो लौट आ ले बचा 
इक दफ़ा, इक दफ़ा, इक दफ़ा...!

👉 In Romanized - Mirza Lyrics

गीतकार: प्लेसिड


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About Mirza (मिर्ज़ा) Song

यह गाना "Mirza" है, जिसे Playsid और Biswaa Deb ने गाया है। इसके बोल Playsid ने लिखे हैं, और संगीत Playsid और Yashab ने कम्पोज़ किया है। मिक्सिंग और मास्टरिंग Raj Narkar ने की है, और यह Sunshine Music लेबल पर रिलीज़ हुआ है। गाने की शुरुआत "हाँ आ वो वो, मिर्ज़ा तेरा, मिर्ज़ा मेरा" से होती है, जो एक दर्द भरी प्रेम कहानी को दर्शाती है।

यह कहानी एक शहज़ादी (राजकुमारी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिस पर गीत का नायक बेइंतहा फ़िदा था। वह उसकी पूरी दुनिया थी, और वह उसका पूरा आशियाँ (घर) था। लेकिन एक नादानी और बेपरवाही के कारण, "वफ़ाई वाली गाड़ी" को खंभे में भिड़ा दिया गया, यानी रिश्ते में एक बड़ी गलती हो गई। नायक माफ़ी मांगता है, "बेबी, आइ’म स्वेयरिंग दैट आइ’म सॉरी", लेकिन शहज़ादी गुमशुदा हो जाती है और फिर कभी नहीं लौटती।

गाने का कोरस "मिर्ज़ा तेरा परेशान फिरे यहाँ-वहाँ" और "तो लौट आ ले बचा, इक दफ़ा" के साथ नायक की बेचैनी और इंतज़ार को दिखाता है। आगे के बोल बताते हैं कि ख़्वाहिशें मतलबी होती हैं, जो हमें कभी किसी की क़दर नहीं करने देतीं। नायक अपनी गलती स्वीकार करता है कि वह तलाश-ए-सुकून में घुल गया, और अब "जीना ज़िंदगी तेरे बिना" एक फ़रियाद लगती है। यह पूरा गाना एक खोए हुए प्यार को पाने की तड़प और माफ़ी की गुहार को बयां करता है।