परवाह नहीं लिरिक्स (Parwah Nahi Lyrics in Hindi) – Rishabh Srivastava | Sunshine Music

परवाह नहीं के प्रेरणादायक बोल – दुनिया की चिंता किए खुद को अपनाने वाला गीत। Rishabh Srivastava की आवाज़ में आत्मविश्वास का संदेश। लिरिक्स पढ़ें।

Parwah Nahi Song Poster from Sunshine Music

Parwah Nahi Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (परवाह नहीं)

कोई ना जाने जो मैंने जाना 
क्या है सही? मैं हूँ बेगाना 
मुझको ले चल ज़िंदगी 
तू कहीं भी 
मैं जो था, मैं हूँ वही 

मुझे परवाह नहीं 
मुझे परवाह नहीं 
मुझे परवाह नहीं 
मुझे परवाह नहीं 

माँगा था जिसको जहाँ में 
दिल ने उसी को गँवाया 
ख़्वाब देखा था मैंने 
ख़्वाब सच हो ना पाया 

तो क्या हुआ? ख़ुद से कहा 
जो ये अधूरी दास्ताँ रही 
मुझे परवाह नहीं, परवाह नहीं 

चाहत ना है मंज़िलों की 
रस्ते ही हैं अपने मेरे 
बेफ़िक्री से है हवा में 
दूर हुए हैं अँधेरे 

मैं चल दिया अब उस जगह 
होगी जहाँ पे सुबह नई 
मुझे परवाह नहीं 
मुझे परवाह नहीं 

मुझको ले चल ज़िंदगी 
तू कहीं भी 
मैं जो था, मैं हूँ वही 

मुझे परवाह नहीं 
मुझे परवाह नहीं 
मुझे परवाह नहीं 
मुझे परवाह नहीं...!

👉 In Romanized - Parwah Nahi Lyrics

गीतकार: अजय बावा, ऋषभ श्रीवास्तव


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About Parwah Nahi (परवाह नहीं) Song

यह गाना "परवाह नहीं" (Parwah Nahi) एक खास मैसेज देता है, जो है - अपने आप को स्वीकार करना और दुनिया की परवाह किए बिना आगे बढ़ना। इस गाने को खुद Rishabh Srivastava ने कम्पोज़ किया है और गाया भी है, जबकि Music Production का काम भी उन्होंने ही किया है। Lyrics Ajay Bawa और Rishabh Srivastava ने मिलकर लिखे हैं, जो इस गाने की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यह गाना Sunshine Music लेबल के तहत रिलीज़ हुआ है, तो अगर आप इसे सुनना चाहें तो यूट्यूब या Spotify पर आसानी से पा सकते हैं।

गाने के बोल (Lyrics) में एक गहरी सोच छिपी है। जैसे पहली पंक्ति में कहा गया है - "कोई ना जाने जो मैंने जाना, क्या है सही? मैं हूँ बेगाना" मतलब कि इंसान अपने आप को दुनिया से अलग महसूस करता है, लेकिन वो इस बात की चिंता नहीं करता। फिर आता है एक सवाल - "माँगा था जिसको जहाँ में, दिल ने उसी को गँवाया" यानी जो चाहा था, वो मिला नहीं, पर खुद से कहा कि "अधूरी दास्ताँ रही तो क्या हुआ?" और फिर जोर से कहता है - "मुझे परवाह नहीं"।

गाने का दूसरा भाग एक नई सोच को दर्शाता है। "चाहत ना है मंज़िलों की, रस्ते ही हैं अपने मेरे" मतलब कि हमें मंज़िल से ज़्यादा सफर से प्यार है। "बेफ़िक्री से है हवा में, दूर हुए हैं अँधेरे" यानी जब हम लापरवाह हो जाते हैं, तो सब अंधेरे दूर हो जाते हैं। आखिर में कहता है - "मैं चल दिया अब उस जगह, होगी जहाँ पे सुबह नई" और फिर वही टेक - "मुझे परवाह नहीं"। यह गाना उन लोगों के लिए है जो खुद की सच्चाई को अपनाते हैं और बेवजह की चिंताओं को छोड़ देते हैं।