माही वे के इश्क वाले बोल – Sultana Nooran और Shabab Sabri की दमदार आवाज़ में प्यार का नशा। मैं माही माही बोलती रवां – पढ़ें पूरे लिरिक्स।
Maahi Ve Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (माही वे)
इश्क़ भी मेरा गली मोहल्ला
हो.. इश्क़ भी मेरा कबीला
मेनू रब तो सोहणा लगदा
आ.. मेरा यार छबीला
हो दो घूंट मेनू इश्क़ दे पिला दे
मैं माही माही बोलती रवां
दो घूंट मेनू इश्क़ दे पिला दे
मैं माही माही बोलती रवां
मेरी रूह तक इश्क़ पहुंचा दे
मेरी रूह तक इश्क़ पहुंचा दे
मैं माही माही..
माही माही वे
मैं क्या जानू क्या रखा है?
मेरे दिल के अंदर
झांक के देखो तो दिखता है
ठहरा हुआ समंदर
इश्क़ का रंग चढ़ा दे मुझको
हो जाऊं मस्त कलंदर
तेरे मेरे विच इश्क़ सजा दे
मैं माही माही बोलता रवां
माही माही माही वे
यार मिले तो हो जाती है
रब से सीधी बात
यार का नाम ज़ुबां पे आए
जाग उठे जज़्बात
हो यार कहे ते सूली चढ़ जा
यार का दिल ना तोड़ो
यार पे दुनिया तो बख्श होवे
सारी दुनिया छोड़ो
मेनू इश्क़ वाली गुड़-टी पिला दे
मैं माही माही बोलती रवां
मेनू इश्क़ वालियां आदतां पवा दे
मैं माही माही बोलता रवां
ओ जी माही.. माही वे..
हर इक साँह विच माही बसदा
हर धड़कन विच माही
माही ते सोहणा कोई नहीं है
माही नूर-ए-इलाही
ओ उसका सजदा जब हो जाए
फिर क्या करना जी के
सारी उमर दा नशा हो गया
इश्क़ प्याला पी के
हो मेनू इश्क़ वाले इत्तर सुंघा दे
मैं माही माही बोलता रवां
माही माही वे...
माही माही वे....!
👉 In Romanized - Maahi Ve Lyrics
गीतकार: अशोक पंजाबी
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About Maahi Ve (माही वे) Song
यहाँ पर "Maahi Ve" गाने के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह गाना Sur Music Records के लेबल पर रिलीज़ हुआ है और इसके बोल Ashok Punjabi ने लिखे हैं। गाने की आवाज़ Sultana Nooran और Shabab Sabri ने दी है, जबकि म्यूज़िक Rahul Rajput ने कंपोज़ किया है। Mix और Master Umar Shaikh ने किया है। Music Video में Ganesh Acharya और Akanksha Puri ने परफॉर्म किया है।
इस गाने के बोल इश्क़ और प्रेम की गहराई को दर्शाते हैं। जैसे शुरू में "इश्क़ भी मेरा गली मोहल्ला, हो.. इश्क़ भी मेरा कबीला" से पता चलता है कि प्यार हर जगह और हर रूप में है। फिर "मेनू रब तो सोहणा लगदा, आ.. मेरा यार छबीला" से यार को खुदा से भी ज़्यादा खूबसूरत बताया गया है। गाने में "दो घूंट मेनू इश्क़ दे पिला दे, मैं माही माही बोलती रवां" लाइन बहुत मशहूर है, जो इश्क़ के नशे की तलब को दिखाती है।
आगे के बोल और भी गहरे हैं, जैसे "मेरी रूह तक इश्क़ पहुंचा दे, मैं माही माही.." और "इश्क़ का रंग चढ़ा दे मुझको, हो जाऊं मस्त कलंदर"। यहाँ "मस्त कलंदर" का मतलब है बेसुध होकर प्यार में डूब जाना। गाने में यार को "नूर-ए-इलाही" यानी ईश्वरीय रोशनी तक कहा गया है, और "सारी उमर दा नशा हो गया, इश्क़ प्याला पी के" से साफ है कि ये प्यार जीवनभर का नशा है। कुल मिलाकर, यह गाना इश्क़ के हर रंग और एहसास को बयान करता है।