राज़ लिरिक्स (Raaz Lyrics in Hindi) – Arjun Iyer | Heer Sara Aur Pondicherry

राज़ के रहस्यमयी और सुंदर बोल – प्यार, खोज और अजीब एहसासों की कहानी। खोकर पाया, पास होकर दूर – इस राज़ को कैसे खोल दूँ? Arjun Iyer की भावुक आवाज़। पढ़ें पूरे लिरिक्स।

Raaz Song Poster from Heer Sara Aur Pondicherry

Raaz Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (राज़)

आज दिल यूँ ही खिल गया, 
आसमाँ ज़मीं से मिल गया। 
मैं क्या करूँ? 

तू वहीं कहीं रुकी-सी थी, 
साँसों में महक छुपी-सी थी। 
मैं क्या करूँ? 

अजीब है समा, धुआँ-धुआँ, 
संग तेरे हुआ मैं लापता। 
सच बता दे, है तू क्या? 
कहाँ से आयी क्या पता? 
क्या ये हो गया? 
इस राज़ को मैं कैसे खोल दूँ? 

पास होकर दूर हूँ कभी, 
दूर होकर पास हूँ अभी। 
हाय! क्या करूँ? 

क्यों मिले तेरा जवाब ना? 
थक जाता, पर सुलझी ना। 
पहेलियों-सी उलझी तू। 

अजीब है समा, धुआँ-धुआँ, 
संग तेरे हुआ मैं लापता। 
सच बता दे, है तू क्या? 
कहाँ से आयी क्या पता? 
क्या ये हो गया? 
इस राज़ को मैं कैसे खोल दूँ? 

ढूँढ़ता तेरे निशान, 
क्या है तू, है कहाँ? 
खो के तुझे पा लिया। 

अजीब है समा, धुआँ-धुआँ, 
संग तेरे हुआ मैं लापता। 
सच बता दे, है तू क्या? 
कहाँ से आयी क्या पता? 
क्या ये हो गया? 
इस राज़ को मैं कैसे खोल दूँ?

गीतकार: निकेत पांडे, अर्जुन अय्यर


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About Raaz (राज़) Song

यहाँ पर गाना "राज़" (Raaz) के बोल (lyrics) की जानकारी दी जा रही है। यह गाना Arjun Iyer ने गाया है, और इसे खुद Arjun Iyer ने ही कम्पोज़ (compose) किया है। इसके बोल Niket Pandey और Arjun Iyer ने लिखे हैं। गाने की प्रोग्रामिंग (programming) भी Arjun Iyer ने की है, जबकि मिक्स और मास्टर (mix and master) Drona Acharya ने किया है। Music Production Head के तौर पर Arjun Iyer ही हैं। इस गाने का Music Video Sony Music India के लेबल (label) पर रिलीज़ हुआ है, जिसमें Patralekhaa, Maanvi Gagroo, Shveta Salve, Arif Zakaria, Nishank Noor और Bunty Chopra जैसे कलाकार नज़र आ रहे हैं।

अब बात करते हैं इस गाने के बोल की थीम (theme) की। ये गाना एक रहस्यमयी और सुंदर एहसास के बारे में है, जहाँ इंसान किसी से मिलकर या किसी के करीब आकर खो जाता है। पहली लाइन "आज दिल यूँ ही खिल गया, आसमाँ ज़मीं से मिल गया" से पता चलता है कि दिल खुशी से भर गया है और सब कुछ एक जैसा लग रहा है। फिर "तू वहीं कहीं रुकी-सी थी, साँसों में महक छुपी-सी थी" कहकर बताया गया है कि वो शख्स कहीं ठहरा हुआ है और उसकी खुशबू साँसों में बसी हुई है। "अजीब है समा, धुआँ-धुआँ" और "संग तेरे हुआ मैं लापता" से ये अंदाज़ा लगता है कि माहौल अनोखा है और वो शख्स उसमें पूरी तरह खोया हुआ है।

इस गाने में ये सवाल बार-बार उठता है कि "सच बता दे, है तू क्या? कहाँ से आयी क्या पता?" यानी वो ये समझने की कोशिश कर रहा है कि ये एहसास या ये शख्स क्या है और कहाँ से आया है। "पास होकर दूर हूँ कभी, दूर होकर पास हूँ अभी" लाइन से पता चलता है कि रिश्ता कभी करीब और कभी दूर लगता है, जैसे कोई पहेली (puzzle) हो। "ढूँढ़ता तेरे निशान, क्या है तू, है कहाँ? खो के तुझे पा लिया" कहकर बताता है कि उसे खोजते-खोजते ही उसे पा लिया गया। आखिर में "इस राज़ को मैं कैसे खोल दूँ?" पूछकर ये बताया गया है कि ये रहस्य (mystery) कैसे सुलझाया जाए। कुल मिलाकर ये गाना प्यार, खोज और अजीब एहसासों पर आधारित है, जिसमें सवाल और जिज्ञासा दोनों हैं।


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