नब्ज़ नब्ज़ - मेल वर्ज़न लिरिक्स (Nabz Nabz - Male Version Lyrics in Hindi) – Aman Pant | Bharat Bhhagya Viddhaata

नब्ज़ नब्ज़ के प्रेरणादायक बोल – Aman Pant की आवाज़ में ज़िंदगी की धड़कनें। हर पल जियो, कल की फिक्र न करो। पढ़ें पूरे लिरिक्स।

Nabz Nabz - Male Version Song Poster from Bharat Bhhagya Viddhaata

Nabz Nabz - Male Version Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (नब्ज़ नब्ज़ - मेल वर्ज़न)

नब्ज़-नब्ज़ चलती है, 
साँस-साँस पलती है, 
लम्हा-लम्हा जीती है 
ज़िंदगी। 

मुस्कुरा के मिलती है, 
धड़कनों में ढलती है, 
पलकों से पिघलती है 
ज़िंदगी। 

कभी ये रूठे तो 
प्यार से मना लीजिए, 
ज़िंदगी अपनी है, 
कोई पराई तो नहीं। 

खुलते-खुलते खुलती है, 
खिलते-खिलते खिलती है, 
एक नदी सी बहती है 
ज़िंदगी। 

हर किसी की ख़ास है, 
सबके आसपास है, 
मुस्कुरा के मिलती है 
ज़िंदगी। 

कल का क्यों ज़िक्र हो? 
हो हो हो हो हो 
कल की क्यों फ़िक्र हो? 
हो हो हो हो हो 

ये घड़ी खोने ना दे, 
और किसी का होने ना दे। 
जब घना अँधेरा छाए, 
नूर बनके आती है ये ज़िंदगी। 

नब्ज़-नब्ज़ चलती है, 
साँस-साँस पलती है, 
लम्हा-लम्हा जीती है ज़िंदगी 
ज़िंदगी। 

हर पल का जश्न मना लो, 
बिगड़ी बात संभालो, 
ढूँढ़ के बहाने से 
हँसो और हँसा लो। 

ये कहीं खो जाएगी, 
एक दिन सो जाएगी। 

नब्ज़-नब्ज़ चलती है, 
साँस-साँस पलती है, 
लम्हा-लम्हा जीती है ज़िंदगी। 
मुस्कुरा के मिलती है, 
धड़कनों में ढलती है, 
पलकों से पिघलती है ज़िंदगी। 

ज़िंदगी...!

गीतकार: मनोज तापड़िया


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About Nabz Nabz - Male Version (नब्ज़ नब्ज़ - मेल वर्ज़न) Song

यह गाना "नब्ज़ नब्ज़ - मेल वर्ज़न" है, जो फिल्म Bharat Bhhagya Viddhaata से लिया गया है। इस फिल्म में Kangana Ranaut मुख्य भूमिका में हैं। गाने को Aman Pant ने गाया और संगीतबद्ध किया है, जबकि इसके बोल Manoj Tapadia ने लिखे हैं। यह गाना Zee Music Company के लेबल पर रिलीज़ हुआ है। गाने का शीर्षक "Nabz Nabz" है, जो ज़िंदगी की धड़कनों और साँसों को दर्शाता है। 

गाने के बोल बहुत ही गहरे और प्रेरणादायक हैं। इसमें कहा गया है कि ज़िंदगी "नब्ज़-नब्ज़ चलती है", यानी हर पल धड़कनों की तरह चलती रहती है। "साँस-साँस पलती है" का मतलब है कि हर साँस के साथ यह पलती-बढ़ती है। "लम्हा-लम्हा जीती है" यानी हर पल को जीना चाहिए। यह गाना हमें सिखाता है कि ज़िंदगी मुस्कुरा कर मिलती है, और इसे धड़कनों में ढलना चाहिए, पलकों से पिघलना चाहिए। 

गाने में आगे कहा गया है कि ज़िंदगी एक नदी की तरह बहती है, और यह हर किसी के लिए ख़ास है। "कल का क्यों ज़िक्र हो?" और "कल की क्यों फ़िक्र हो?" ये लाइनें हमें बताती हैं कि हमें अतीत या भविष्य की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि वर्तमान पल को जीना चाहिए। गाने का संदेश है कि हर पल का जश्न मनाएँ, बिगड़ी बातों को संभालें और हँसते रहें। क्योंकि ज़िंदगी एक दिन खो जाएगी या सो जाएगी, इसलिए इसे पूरी तरह से जीना चाहिए।


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Song Details

Song Nabz Nabz - Male Version
Album Bharat Bhhagya Viddhaata

Frequently Asked Questions

Which album is "Nabz Nabz - Male Version" from?

The song is from the album "Bharat Bhhagya Viddhaata".