अली का मुसल्ला लिरिक्स (Ali Ka Musalla Lyrics in Hindi) – Salim Merchant, Imran Abidi | Salim Sulaiman Music

अली का मुसल्ला के लिरिक्स | इमाम अली (अ.स.) की शहादत पर दर्द भरा नौहा। सलीम मर्चेंट और इमरान आब्दी की आवाज़ों में। खून से सजा वो मुसल्ला। पढ़ें यह मार्मिक नौहा।

Ali Ka Musalla Song Poster from Salim Sulaiman Music

Ali Ka Musalla Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (अली का मुसल्ला)

या अली या अली या अली
या अली या अली या अली

तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला
तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला

ऐ मोमिनो पढ़ो अब
रो रो ये नौहा
ऐ मोमिनो पढ़ो अब
रो रो ये नौहा

तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला
तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला

मुलजिम ये सितम कैसा
नमाज़ी पे है ढाया
मुलजिम ये सितम कैसा
नमाज़ी पे है ढाया

ज़र्ब ऐसी लगाई है के
सर हो गया नीला

तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला
तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला

ऐ मोमिनो पढ़ो अब
रो रो ये नौहा
तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला

कूफ़े के यतीमों का
सहारा था वो मौला
कूफ़े के यतीमों का
सहारा था वो मौला

अब कौन अँधेरे में
उन्हें देगा निवाला

तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला
तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला

ऐ मोमिनो पढ़ो अब
रो रो ये नौहा
तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला

जो नाम-ए-अली लेकर
जीता है ज़माना
जो नाम-ए-अली लेकर
जीता है ज़माना

अब कोई नहीं है उन्हें
जीने का बहाना

तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला
तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला

ऐ मोमिनो पढ़ो अब
रो रो ये नौहा
तर हो गया है खून में
अली का मुसल्ला...

अली का मुसल्ला...
अली का मुसल्ला...!

👉 In Romanized - Ali Ka Musalla Lyrics

गीतकार: इमरान आबिदी


About Ali Ka Musalla (अली का मुसल्ला) Song

यह गाना "अली का मुसल्ला" एक दर्द भरा nauha है, जिसे Salim Merchant और Imran Abidi ने पेश किया है, यह गाना उस दिल दहला देने वाले पल को याद करता है जब Imam Ali (AS) को Kufa की मस्जिद में Fajr की नमाज़ के दौरान sajdah की हालत में वार किया गया था, यहाँ musalla यानी नमाज़ की चटाई एक गूंगा गवाह बन गई, जिसने इस्लामी इतिहास के एक दुखदतम पल — Commander of the Faithful की शहादत को देखा।

इस गाने की music Salim Sulaiman ने compose और produce की है, जबकि lyrics Imran Abidi के द्वारा लिखे गए हैं, backing vocals में Keshav Anand, Diptanshu Tiwari, Raj Pandit और Shivansh Jindal की आवाज़ें हैं, और यह Salim Sulaiman Music व Merchant Records के label के तहत जारी किया गया है, गाने के बोल बहुत ही मार्मिक हैं, जैसे "तर हो गया है खून में अली का मुसल्ला", जो बताता है कि कैसे Imam Ali का musalla खून से भीग गया, और "ऐ मोमिनो पढ़ो अब रो रो ये नौहा", जो मोमिनों से इस दुख को याद करने और शोक मनाने की गुज़ारिश करता है।

गाने की कविता इस घटना के दर्द को गहराई से दर्शाती है, जैसे "मुलजिम ये सितम कैसा नमाज़ी पे है ढाया", जो उस ज़ुल्म को दिखाता है जो एक नमाज़ी पर ढाया गया, और "कूफ़े के यतीमों का सहारा था वो मौला", जो Imam Ali के उस रोल को याद कराता है जो Kufa के यतीमों का सहारा थे, गाना यह भी कहता है कि "जो नाम-ए-अली लेकर जीता है ज़माना", यानी वह दुनिया जो Imam Ali के नाम पर जीती थी, अब उनके बिना अधूरी लगती है, यह गाना दिल को छू लेने वाला है और इमाम अली के प्रति गहरी श्रद्धा और उनकी शहादत के दुख को व्यक्त करता है।