मायावी 2.0 के लिरिक्स – Sonu Nigam का जादूई स्वर। किसी की मोहक आँखों का जादू और एक बेसब्री का इंतज़ार। Salim Sulaiman Music के इस मशहूर ट्रैक के पूरे बोल पढ़ें।
Mayavi 2.0 Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (मायावी 2.0)
मायावी अंखियाँ तेरी
करने लगी क्या जादूगरी?
मैं हूँ यहाँ खोया-खोया
तुमसे मिली ये बेसब्री
मरकज़ हो मेरी दुनिया के तुम ही
हाँ, तुम-सा कोई नहीं
क़ैद करो ज़ुल्फ़ों से ज़रा
चाहूँ कभी ना होना रिहा
रूह में घुल ऐसा कुछ कर
इतने मेरे नज़दीक तू आ
क़ुदरत से माँगा है
डाली हैं अर्ज़ियाँ
अब आगे होगा जो
क़िस्मत की मर्ज़ियाँ
जो भी होगा, होगा जो भी
जो भी होगा, होगा जो भी
होते-होते
आएगा दिन ऐसा भी कोई
जब तुम मुझसे ये कहोगी कभी
हम तुम से बने एक जान नई
ज़िंदगी का चलन बस है तो यही
मरकज़ हो मेरी दुनिया के तुम ही
हाँ, तुम-सा कोई नहीं
यारा ओ यारा,
गाता हूँ सारा दिन सारा
माने न माने
दिल ये कैसा है बेचारा
हाँ... नूर से तेरे जो टकराए
वश में वो तेरे आ जाए
मुश्किल है अब होना गुज़ारा
तुम न मिलो तो मर जाएँ
जो भी होगा, होगा जो भी
हाय जो भी होगा, होगा जो भी
होते-होते
आएगा दिन ऐसा भी कोई
जब तुम मुझसे ये कहोगी कभी
हम तुम से बने एक जान नई
ज़िंदगी का चलन बस है तो यही
मरकज़ हो मेरी दुनिया के तुम ही
हाँ, तुम-सा कोई नहीं
मायावी....!
👉 In English - Mayavi 2.0 Lyrics
गीतकार: श्रद्धा पंडित
About Mayavi 2.0 (मायावी 2.0) Song
यह गाना है "Mayavi 2.0", जिसे Sonu Nigam ने गाया है, और इसे Salim Sulaiman ने produce और arrange किया है, music composed किया है Sanjith Hegde ने, lyrics लिखे हैं Shraddha Pandit ने, और यह गाना Salim Sulaiman Music label से release हुआ है।
गाने की शुरुआत में ही, lyrics बताते हैं कि गायक किसी की "मायावी अंखियाँ" से मोहित है, और पूछता है कि क्या उन आँखों ने जादू कर दिया है, वो खोया-खोया सा महसूस कर रहा है, और उस व्यक्ति से मिलने की एक बेसब्री है उसके अंदर, फिर वो कहता है कि तुम ही मेरी दुनिया का मरकज़ (केंद्र) हो, और तुम-सा कोई नहीं है।
आगे के lyrics में, गायक चाहता है कि सामने वाला उसे अपनी ज़ुल्फ़ों से क़ैद कर ले, ताकि वो कभी आज़ाद न होना चाहे, वो चाहता है कि वो इतना नज़दीक आए कि उसकी रूह में घुल जाए, फिर वो कहता है कि उसने क़ुदरत से माँगा है, अर्ज़ियाँ डाली हैं, और अब जो भी होगा वो क़िस्मत की मर्ज़ी होगी, वो बार-बार दोहराता है "जो भी होगा, होगा जो भी", और आशा करता है कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब सामने वाला उससे कहेगी कि "हम तुम से बने एक जान नई, ज़िंदगी का चलन बस है तो यही"।
गाने के अंतिम हिस्से में, एक संवाद जैसा भाव है, "यारा ओ यारा, गाता हूँ सारा दिन सारा", यानी गायक पूरा दिन गाता रहता है, चाहे कोई माने या न माने, उसका दिल बेचारा-सा है, फिर वो कहता है कि जो भी तेरे नूर (चमक) से टकराएगा, वो तेरे वश में आ जाएगा, अब बिना तुम्हारे गुज़ारा करना मुश्किल है, तुम न मिलो तो मर जाएँ, और फिर से वही आशा दोहराई जाती है कि एक दिन सामने वाला ज़रूर कहेगी कि हम एक जान बन गए हैं, और तुम ही मेरी दुनिया का केंद्र हो, तुम-सा कोई नहीं है, और गाना "मायावी....!" कहकर समाप्त होता है।