दो दीवाने शहर में लिरिक्स (Do Deewane Sheher Mein - Reprised Lyrics in Hindi) – Runa Laila, Bhupinder Singh | Do Deewane Seher Mein
Do Deewane Sheher Mein - Reprised Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (दो दीवाने शहर में)
दीवाना
एक दीवाना शहर में
एक दीवाना नहीं,
एक दीवानी भी
दो दीवाने शहर में,
रात में या दोपहर में
आब-ओ-दाना
आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं,
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं
आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं,
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं
दो दीवाने शहर में,
रात में या दोपहर में
आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं,
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं
दो दीवाने...
इन भूल-भुलैया, गलियों में
अपना भी कोई इक घर होगा
अंबर पे खुलेगी खिड़की या,
खिड़की पे खुला अंबर होगा
इन भूल-भुलैया, गलियों में
अपना भी कोई इक घर होगा
अंबर पे खुलेगी खिड़की या,
खिड़की पे खुला अंबर होगा
असमानी रंग की आँखों में
असमानी या आसमानी?
असमानी रंग की आँखों में
बसने का बहाना ढूँढ़ते हैं, ढूँढ़ते हैं
आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं,
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं
दो दीवाने शहर में,
रात में या दोपहर में
आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं,
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं
दो दीवाने, दो दीवाने
दो दीवाने, हाँ, दो दीवाने
दो दीवाने...!
गीतकार: गुलज़ार
About Do Deewane Sheher Mein - Reprised (दो दीवाने शहर में) Song
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