वो नहीं के लिरिक्स | मैं वापस आऊंगा का दर्द भरा गीत। ए आर रहमान के सुर, इरशाद कामिल के गहरे शब्द। शहर, भीड़, काम सब है... बस वो नहीं। पढ़ें।
Vo Nahin Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (वो नहीं)
शहर है, लोग हैं, भीड़ है, काम है
गुनगुनी धूप है, शाम है
मैं भी हूँ, वो नहीं
वो नहीं जो मेरे नाम है
शोर है, फ़िक्र है
मैं भी हूँ, वो नहीं...
है यही सच मेरा, है यही सच तेरा
नफ़रतों में मोहब्बत को ना भूलना
हाथ जो है उठा, गर्दनें जो कटीं
वो भी मैं, वो भी तू, आदमी
नब्ज़ है, खून है, साँस है, जिस्म है
ज़िंदगी जीने की
ये भला कौन सी किस्म है?
नाम भी है मेरा, शक्ल भी है मेरी
दोनों में जो था मैं, वो नहीं...
तुम ही हो जो दूर-दूर दिल करते
तुम ही हो जो रोम-रोम दुख भरते
तुम ही हो जो शाख-शाख बन कटते
तुम ही हो जो प्यार-प्यार नित रटते
तुम ही तो भीड़ और दल बन जाते
तुम ही तो लालचों से छन जाते
तुम ही शहर-शहर फिरते हो
तुम ही जो रोज़ आँखों से गिरते
तुम ही हो जो साफ़-साफ़ सब दिखते
तुम ही हो जो झूठ-मूठ सब लिखते
तुम ही हो जो रोज़-रोज़ बढ़ जाते
तुम ही हो जो जीते-जी ही मर जाते
तुम ही हो जो दूर-दूर दिल करते
तुम ही हो जो रोम-रोम दुख भरते
किस तरह अब मेरे दर्द का हो बयान
लफ़्ज़ तो खो गए चीख़ में,
मेरे टुकड़े हुए
मेरे टुकड़े तो तुम मोड़ दो भीख में
मैं अभी हूँ यहीं, वो नहीं...!
गीतकार: इरशाद कामिल
About Vo Nahin (वो नहीं) Song
यह गाना "Vo Nahin" फिल्म "Main Vaapas Aaunga" से है, जिसमें Diljit Dosanjh, Vedang Raina और Sharvari मुख्य भूमिका में हैं। इस गाने को A.R. Rahman ने खुद कम्पोज़, प्रोड्यूस और अरेंज किया है, जबकि इसके बोल Irshad Kamil ने लिखे हैं। इसे तीन गायकों — Adithya RK, Armaan Khan और Sameer Khan — ने मिलकर गाया है, और म्यूज़िक लेबल Tips Official है।
गाने के बोल बहुत गहरे और भावनात्मक हैं — यह एक ऐसे इंसान की कहानी बताता है जो शहर की भीड़, शोर और काम के बीच खुद को तो महसूस करता है, लेकिन जो उसके "नाम" पर थी, वो (Vo Nahin) अब उसके साथ नहीं है। लिरिक्स में "शहर है, लोग हैं, भीड़ है, काम है, गुनगुनी धूप है, शाम है, मैं भी हूँ, वो नहीं" जैसी लाइनें बताती हैं कि ज़िंदगी में सब कुछ होने के बावजूद एक अहम शख्सियत की कमी खलती है। यह गाना अकेलेपन, दर्द और यादों के झरोखे से लिखा गया है।
आगे के बोल और भी गहरे हो जाते हैं — "नफ़रतों में मोहब्बत को ना भूलना", "नब्ज़ है, खून है, साँस है, जिस्म है, ज़िंदगी जीने की ये भला कौन सी किस्म है?" — यह सवाल उठाते हैं कि जब सब कुछ मौजूद है तो फिर ये दर्द क्यों है? आखिरी हिस्से में "मेरे टुकड़े हुए, मेरे टुकड़े तो तुम मोड़ दो भीख में, मैं अभी हूँ यहीं, वो नहीं" कहकर गाना एक दिल तोड़ देने वाले मोड़ पर खत्म होता है, जहाँ इंसान अपने अस्तित्व के टुकड़ों के बीच भी उसी की तलाश करता है जो अब नहीं है।