आज ये बसंत लिरिक्स (Aaj Yeh Basant - Female Version Lyrics in Hindi) – Sunetra Banerjee | Afwaah

आज ये बसंत फीमेल वर्जन के बोल | Sunetra Banerjee की कशिश भरी आवाज़ में। Afwaah की भावनाओं को एक नया नजरिया। यह संस्करण दिल को छू लेगा।

Aaj Yeh Basant - Female Version Song Poster from Afwaah

Aaj Yeh Basant - Female Version Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (आज ये बसंत)

आज ये बसंत थोड़ा 
बावला हुआ माँ 
आज ये बसंत थोड़ा 
बावला हुआ माँ 

सरसों के खेत में 
अफ़ीम उग आया 
सरसों के खेत में 
अफ़ीम उग आया 

सांझ की ख़बर यही 
जुगनू को साथ लेके 
भँवरे ने तितली के 
तितली के पंख को, जलाया 

आज ये बसंत थोड़ा 
बावला हुआ माँ 
आज ये बसंत थोड़ा 
बावला हुआ माँ 

धुआँ थोड़ा, आग थोड़ी 
आँधियाँ तेज़ाब ये 
किसने ये रखे हैं जाके? 
चाँद की कटोरी में 

नींदें पत्थरीली 
मेरे ख़्वाब बंजर हैं सभी 
कुछ तो कमी है माँ 
आज तेरी लोरी में 
आज तेरी लोरी में 

आज ये बसंत थोड़ा 
बावला हुआ माँ 

मेरी अँखियों में लाल रंग 
उतरा है जो 
मेरी अँखियों में लाल रंग 
उतरा है जो 

ख़ून ये नहीं है लाल 
रेत का ही साया है 
बिखरे पड़े हैं, माँ 
बोल चारों ओर मेरे 

बस ज़रा रेत का 
गुब्बार छाया है 
गुब्बार छाया है 

आज ये बसंत थोड़ा 
बावला हुआ माँ 
आज ये बसंत थोड़ा 
बावला हुआ माँ 

आ..आ..आ..आ..आ...!

गीतकार: डॉ. सागर


About Aaj Yeh Basant - Female Version (आज ये बसंत) Song

यह गाना "आज ये बसंत Female Version" है, जो movie "Afwaah" से है, जिसमें Nawazuddin Siddiqui और Bhumi Pednekar मुख्य कलाकार हैं, यह गाना T-Series के label से release हुआ है, और इसे Sunetra Banerjee ने गाया है, music director Shameer Tandon हैं, और lyrics Dr. Sagar ने लिखे हैं। 
गाने के lyrics में बसंत के मौसम को एक अलग ही रूप में दिखाया गया है, जहाँ बसंत को "बावला" यानी पागलपन से भरा हुआ बताया गया है, lyrics कहते हैं "आज ये बसंत थोड़ा बावला हुआ माँ", यह एक poetic तरीके से बसंत की खुशी के बजाय उसकी उलझन और अशांति को दर्शाता है, जैसे कि सरसों के खेत में अफ़ीम उग आना, यह एक metaphor है जो सुंदरता के बीच अचानक आए विषैलेपन को दिखाता है। 

आगे के lyrics में प्रकृति के elements को symbolic तरीके से इस्तेमाल किया गया है, जैसे कि भँवरे द्वारा तितली के पंख को जलाना, यह नाजुकता के नष्ट होने की भावना को दर्शाता है, lyrics में धुएं, आग, तेज़ाब जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके एक डरावनी और उदास atmosphere बनाई गई है, गाना कहता है "चाँद की कटोरी में नींदें पत्थरीली", यह एक तरह की emotional सुन्नता और बेचैनी को express करता है, जैसे कि सब कुछ सुंदर दिखने के बावजूद अंदर से खोखला और कठोर है। 

अंत में, lyrics आँखों में लाल रंग के बारे में बात करते हैं, लेकिन यह खून नहीं बल्कि रेत का साया बताया गया है, यह illusion या धोखे की भावना को दर्शाता है, "बोल चारों ओर मेरे बस ज़रा रेत का गुब्बार छाया है" यह लाइन अस्थिरता और नाजुक सुख की temporary nature को show करती है, overall, यह गाना बसंत की traditional खुशी के विपरीत एक dark, thoughtful और emotional journey present करता है, जो listeners को deep meanings के बारे में सोचने पर मजबूर कर देता है।


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