आज ये बसंत के लिरिक्स | Afwaah का काव्यात्मक और गहरा भावनात्मक गीत। Mame Khan की सुरीली आवाज़। एक 'बावले' बसंत की मार्मिक कहानी।
Aaj Yeh Basant Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (आज ये बसंत)
आज ये बसंत थोड़ा
बावला हुआ माँ
आज ये बसंत थोड़ा
बावला हुआ माँ
सरसों के खेत में
अफ़ीम उग आया
सरसों के खेत में
अफ़ीम उग आया
सांझ की ख़बर यही
जुगनू को साथ लेके
भँवरे ने तितली के
तितली के पंख को, जलाया
आज ये बसंत थोड़ा
बावला हुआ माँ
आज ये बसंत थोड़ा
बावला हुआ माँ...आ...आ..
धुआँ थोड़ा, आग थोड़ी
आँधियाँ तेज़ाब ये
किसने ये रखे हैं जाके?
चाँद की कटोरी में
नींदें पत्थरीली
मेरे ख़्वाब बंजर हैं सभी
कुछ तो कमी है माँ
आज तेरी लोरी में
आज तेरी लोरी में
आज ये बसंत थोड़ा
बावला हुआ माँ
मेरी अँखियों में लाल रंग
उतरा है जो
मेरी अँखियों में लाल रंग
उतरा है जो
ख़ून ये नहीं है लाल
रेत का ही साया है
ख़ून ये नहीं है लाल
रेत का ही साया है
बिखरे पड़े हैं, माँ
बोल चारों ओर मेरे
बस ज़रा रेत का
गुब्बार छाया है
गुब्बार छाया है
आज ये बसंत थोड़ा
बावला हुआ माँ
आ..आ..आ..आ..आ...!
गीतकार: डॉ. सागर
About Aaj Yeh Basant (आज ये बसंत) Song
यह गाना "आज ये बसंत Mame Khan Version" है, जो movie Afwaah का हिस्सा है, जिसमें Nawazuddin Siddiqui और Bhumi Pednekar मुख्य कलाकार हैं, इसे music label T-Series ने रिलीज़ किया है, गाने के composer और music director Shameer Tandon हैं, singer Mame Khan हैं और lyrics Dr. Sagar ने लिखे हैं।
गाने के बोल एक अलग तरह के बसंत का वर्णन करते हैं, जो पारंपरिक खुशहाल मौसम की जगह एक "बावला" यानी उत्तेजित और अशांत रूप दिखाता है, lyrics में कहा गया है "आज ये बसंत थोड़ा बावला हुआ माँ", फिर इसमें प्रतीकात्मक भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जैसे "सरसों के खेत में अफ़ीम उग आया", जो अचानक बदलाव या विषैलेपन को दर्शाता है, साथ ही "भँवरे ने तितली के पंख को जलाया" जैसी पंक्तियाँ प्रेम, नुकसान या धोखे की जटिल भावनाएँ बताती हैं।
आगे के हिस्से में, गाना गहरी व्यक्तिगत पीड़ा और खालीपन को छूता है, जैसे "नींदें पत्थरीली, मेरे ख़्वाब बंजर हैं", जो सपनों के सूख जाने और भावनात्मक सुन्नता को दिखाता है, lyrics "मेरी अँखियों में लाल रंग उतरा है" की बात करते हैं, फिर स्पष्ट करते हैं कि यह ख़ून नहीं बल्कि "रेत का साया" है, जो झूठी उम्मीद या टूटे हुए वादों का प्रतीक है, अंत तक, गाना इस "बावले बसंत" की थीम को दोहराता है, जो पूरी तरह से एक उलझी हुई भावनात्मक स्थिति, प्रकृति में विरोधाभास और आंतरिक अशांति को चित्रित करता है, यह एक शक्तिशाली गीत है जो सुनने वाले को गहराई से सोचने पर मजबूर कर देता है।