पागल परिंदे के बोल | The Kerala Story का दर्द भरा गीत। Sunidhi Chauhan की मार्मिक आवाज़। एक अंधे परिंदे की कहानी जो मंज़िल भटक गया। सुनकर दिल रो उठेगा।
Paagal Parindey Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (पागल परिंदे)
ना ज़मीं मिली, ना फ़लक मिला
है सफ़र में अंधा परिंदा
जिस राह की मंज़िल नहीं
वहीं खो गया हो के गुमराह
ना ज़मीं मिली, ना फ़लक मिला
है सफ़र में अंधा परिंदा
जिस राह की मंज़िल नहीं
वहीं खो गया हो के गुमराह
हवा गाँव की अब भी ढूँढ रही
बेबस आँखें ये धुँधली होती रही
ना बोला कुछ, ना कुछ कहा
कोई जाता है क्या इस तरह?
ना ज़मीं मिली, ना फ़लक मिला
है सफ़र में अंधा परिंदा
जिस राह की मंज़िल नहीं
वहीं खो गया हो के गुमराह
ज़िंदान को उड़ान समझ बैठा
इक बार भी मुड़के ना देखा
हरे पेड़ों की शाख़ें छोड़ आया
मासूम को किसने बहकाया?
हरियाली वो यादों में आती रही
राहें तक़रीरें रोज़ सुनाती रहीं
ना दुआ मिली, ना मिला ख़ुदा
हुआ क़ैद पागल परिंदा
ना.. ज़मीं मिली, ना फ़लक मिला
है सफ़र में अंधा परिंदा
जिस राह की मंज़िल नहीं
वहीं खो गया हो के गुमराह
ज़हन में किसने ज़हर डाला?
रूह पे कहर कर डाला
झूठी तस्वीर दिखा के मज़हब की
कमबख़्त इंसाँ बदल डाला
दोज़ख़ की तरफ़, हाय नादान चली
जन्नत गाँव में थी अच्छी-भली
आँखें खुलीं तो सब दिखा
गुमनाम है ये परिंदा
ना ज़मीं मिली, ना फ़लक मिला
है सफ़र में अंधा परिंदा
जिस राह की मंज़िल नहीं
वहीं खो गया हो के गुमराह...!
गीतकार: ओज़ील दलाल
About Paagal Parindey (पागल परिंदे) Song
यह गाना "पागल परिंदे" है, जो The Kerala Story फिल्म का हिस्सा है, इसे Sunidhi Chauhan और Bishakh Jyoti ने गाया है, और संगीत Bishakh Jyoti द्वारा दिया गया है, जबकि गीत Ozil Dalal ने लिखे हैं, यह गाना Sunshine Music पर उपलब्ध है, और फिल्म में Adah Sharma, Siddhi Idnani, Yogita Bihani और Sonia Balani मुख्य भूमिकाओं में हैं।
गीत की शुरुआत "ना ज़मीं मिली, ना फ़लक मिला" से होती है, जो एक अंधे परिंदे की कहानी कहता है, जो अपने सफर में भटक गया है, उसे न तो जमीन मिली और न ही आसमान, और जिस रास्ते की कोई मंजिल नहीं, वहीं वह गुमराह हो गया, गीत में गाँव की हवा और धुंधली आँखों का जिक्र है, जो बेबसी और खोए हुएपन की भावना को दर्शाता है, फिर गीत आगे बढ़ता है और पूछता है कि कोई इस तरह कैसे चला जाता है, बिना कुछ बोले या कहे।
अगले हिस्से में, गीत बताता है कि कैसे यह परिंदा जिंदान को उड़ान समझ बैठा, और हरे पेड़ों की शाखों को छोड़ आया, यहाँ मासूमियत के बहकाए जाने का दर्द है, और हरियाली की यादें लौटती रहती हैं, गीत में दुआ और खुदा न मिलने की बात है, और परिंदे के पागल और कैद होने की कहानी है, आखिरी भाग में, गीत सवाल करता है कि जहन में जहर किसने डाला, और कैसे झूठी तस्वीर दिखाकर इंसान को बदल दिया गया, गाँव की जन्नत छूट गई और दोजख की तरफ नादान चली, जब आँखें खुलीं तो सब कुछ साफ दिखा, और यह परिंदा गुमनाम रह गया, फिर से वही दोहराव कि न जमीन मिली न आसमान, और यह अंधा परिंदा बिना मंजिल के रास्ते में खो गया।
यह गाना एक गहरी भावनात्मक यात्रा को दर्शाता है, जो भटकाव, धोखे और अपनी पहचान खोने के विषयों को छूता है, संगीत और गायन में दर्द और उदासी की गूंज है, जो श्रोता को गीत के भाव से जोड़ती है, और The Kerala Story फिल्म के कथानक से भी इसे जोड़कर देखा जा सकता है।