तुम नमक नहीं चंदन हो कवि लिरिक्स (Chhaava Poetry Lyrics in Hindi) – Vicky Kaushal, Vineet Kumar Singh

तुम नमक नहीं चंदन हो कवि के पूरे बोल पढ़ें। Chhaava का यह भावुक क्लाइमेक्स सीन जहाँ Vicky Kaushal (छत्रपति संभाजी) और Vineet Kumar Singh (कवि कलश) की शक्तिशाली कविता-वार्ता होती है। 'मन के जीते जीत है' वाली इस प्रेरणादायी कविता के लिरिक्स यहाँ देखें।

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Chhaava Poetry Lyrics in Hindi – Full Last Scene Poem Dialogue Lyrics (तुम नमक नहीं चंदन हो कवि)

महाराज: इनके शब्द इच्छाधारी हथियार है,
कभी तीर बन जाते है, कभी तलवार!

महाराज: चांदोगामात्य!
याद है हमने कहा था आपसे एक बार
कि हम आप से कविताओं कि प्रतियोगिता करेंगे।

कवि: और हमने कहा था कि
आप बिना प्रतियोगिता के विजयी हैं!
 

महाराज:
मन के जीते जीत है,
मन के हारे हार।

कवि:
हार गए जो बिन लड़े,
उन पर है धिक्कार।

महाराज:
उन पर है धिक्कार
जो देखे न सपना,

कवि:
सपनों का अधिकार
असल अधिकार है अपना।

महाराज:
अपनों की खातिर
करना कुछ आज हमें।
अजर अमर कर देना है स्वराज हमें।

कवि:
तू माटी का लाल है,
कोई कंकड़ या धूल नहीं।
तू समय बदल के रख देगा,
इतिहास लिखेगा, भूल नहीं।

महाराज:
तू भोर का पहला तारा है,
परिवर्तन का एक नारा है।
यह अंधकार कुछ पल का है,
फिर सब कुछ तुम्हारा है।
 

कवि: सेवक का आखिरी मुजरा स्वीकार कीजिए, राजे!
 

कवि:
जा रहे हैं,
आपके शत्रुओं के चोट पर लगने।
हमने कहा था, हम नमक हैं महाराज...

महाराज:
तुम नमक नहीं, चंदन हो कवि,
तुम तिलक, हमारे माथे का!
 

कवि: कविताएं ख़त्म हुई राजे!
अंत में जीत आपकी हुई।
 

कवि:
जनमानस के भूप रहोगे।
चरम चमकती धूप रहोगे।
प्रसन्न रहे माता जगदंबा।
ओ छत्रपति, ओ सहचर संभा!

हम नमक हैं महाराज...
हम नमक हैं!

महाराज:
तुम नमक नहीं, चंदन हो कवि,
तुम तिलक, हमारे माथे का!

गीतकार: कवि कलश


About Chhaava Poetry (तुम नमक नहीं चंदन हो कवि)

यह संवाद/कविता "तुम नमक नहीं चंदन हो कवि" Chhaava movie के climax scene से है, जो एक powerful poetry dialogue है, इसमें Vicky Kaushal (Sambhaji Maharaj) और Vineet Kumar Singh (Kavi Kalash) के बीच का संवाद है, यह कविता असल में Man Ke Jeete Jeet Hai Man Ke Haare Haar poem के नाम से प्रचलित है, जिसे Kavi Kalash ने लिखा है, यह scene movie के emotional peak पर है, जहाँ Sambhaji Maharaj और कवि के बीच भावनात्मक और प्रेरणादायक वार्तालाप होता है।

इस कविता की lyrics में deep meaning है, शुरुआत में महाराज कहते हैं कि शब्द इच्छाधारी हथियार हैं, कभी तीर बन जाते हैं, कभी तलवार, फिर वे कवि को याद दिलाते हैं कि वे कविताओं की प्रतियोगिता करेंगे, लेकिन कवि कहता है कि महाराज बिना प्रतियोगिता के ही विजयी हैं, इसके बाद दोनों मन की शक्ति के बारे में बात करते हैं, जैसे "मन के जीते जीत है, मन के हारे हार", और सपनों के अधिकार को असल अधिकार बताया गया है।

अंतिम भाग में, कवि खुद को नमक कहता है, लेकिन महाराज उसे चंदन और अपने माथे का तिलक बताते हैं, यह dialogue दोस्ती, समर्पण और स्वराज के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है, कवि कहता है "जनमानस के भूप रहोगे, चरम चमकती धूप रहोगे", और कविता "हम नमक हैं" के साथ खत्म होता है, यह Chhaava Climax Poetry Scene Lyrics के लिए एक यादगार और भावुक पल है, जो viewers को inspire करता है।


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