ईचकदाना लिरिक्स (Ichakdana Lyrics in Hindi) – Divya Kumar, Pardhaan | Jolly LLB 3

ईचकदाना के लिरिक्स | Jolly LLB 3 का रंगीन और उलटफेर वाला गाना। Divya Kumar की शानदार आवाज़ और Pardhaan का धमाकेदार रैप। जिंदगी के फंदे की कहानी।

Ichakdana Song Poster from Jolly LLB 3

Ichakdana Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (ईचकदाना)

सर भन्नाया, तोते उड़ गए
चिपका चाबूक, घोड़े खुल गए

सर से लेकर पांव तलक
रंग गए काजल की कोठरिया में
गुस्से का हम थूक गटक गए,
बनके देखो धूप चटक गए

हाथ लगा ना कुछ भी, भैया,
लुट गए भरी दुपहरिया में

ईचकदाना, ऊचकदाना
फँसा कबूतर चुग के दाना
खाया-पीया कुछ नहीं
गिलास तोड़ा बारा आना

ईचकदाना, ऊचकदाना
फँसा कबूतर चुग के दाना
खाया-पीया कुछ नहीं
गिलास तोड़ा बारा आना

दो इक्कम दो, दो दूनी चार
कौवे ने कर दिया कौवे पे वार
दो तिया छे, दो चौके आठ
कौवे लगावे से कौवे की वाट

दो पंजे दस, दो छक्के बारह
कौवे से आखिर में कौवा ही हारा
दो सत्ते चौदह, अठे सोलह होता है
कौवा तो घणा बड़बोला होता है

दो नवां अठारह,
दहा कहते हैं बीस
कौवे का पहाड़ा है ये,
कौवा very cheap
कौवा very cheap
(बोलो, बोलो, बोलो)
बोलो कौवा very cheap
नि-सा, नि-सा, नि-सा, नि-सा

रंगबाजी की हवा भरा
गुब्बारा फूटा है
बैठा अपनी किस्मत पे
तू गाड़ के खूंटा है

जब तीर लिया उड़ता, बबुआ,
फिर काहे सोचे तू
तेरे ही कंकड़ से तेरा
मटका फूटा है

देख तमाशा बन गए कैसे
हम तो बीच-बजरिया में
सोए थे हम महल में लेकिन
आँख खुली है झोपड़िया में
हाथ लगा ना कुछ भी, भैया,
कुछ ना बचा गठरिया में

ईचकदाना, ऊचकदाना
फँसा कबूतर चुग के दाना
खाया-पीया कुछ नहीं
गिलास तोड़ा बारा आना
ईचकदाना, ऊचकदाना
फँसा कबूतर चुग के दाना
खाया-पीया कुछ नहीं
गिलास तोड़ा बारा आना...!

गीतकार: अखिल तिवारी


About Ichakdana (ईचकदाना) Song

यह जानकारी Jolly LLB 3 movie के गाने "ईचकदाना (Ichakdana)" के बारे में है, जिसे Aman Pant ने compose किया है और Divya Kumar ने गाया है, इसमें Pardhaan का rap और Akhil Tiwari व Rajath Krishnan के additional vocals हैं, lyrics भी Akhil Tiwari के द्वारा लिखे गए हैं।

गाने के lyrics एक कहानी सुनाते हैं, जहाँ "सर भन्नाया, तोते उड़ गए" जैसी पंक्तियों से एक अफरातफरी और उलटफेर का माहौल बनता है, काजल की कोठरी, गुस्सा, धूप चटकना जैसे शब्द एक तनाव और गर्मी भरे scene को दिखाते हैं, फिर "हाथ लगा ना कुछ भी, भैया" से एक खालीपन और निराशा का भाव आता है, मुख्य refrain "ईचकदाना, ऊचकदाना, फँसा कबूतर चुग के दाना" एक फंसे हुए, मुश्किल में घिरे इंसान की तरह है, जिसने कुछ पाया नहीं पर नुकसान जरूर उठाया, जैसे "गिलास तोड़ा बारा आना"।

आगे के हिस्से में कौवे की कहानी के जरिए एक मजाकिया और तीखा social commentary है, "दो इक्कम दो" से शुरू होकर tables बताते हुए यह दिखाया गया है कि कैसे लालच और झगड़े में आदमी खुद का नुकसान कर बैठता है, "कौवा very cheap" जैसी line से एक चालाक परन्तु छोटे दिमाग वाले character की झलक मिलती है, अंत में "रंगबाजी की हवा भरा गुब्बारा फूटा है" और "तेरे ही कंकड़ से तेरा मटका फूटा है" जैसी पंक्तियाँ यह संदेश देती हैं कि इंसान अपनी ही बनाई स्थितियों में फंस जाता है, और अचानक "महल" से "झोपड़ी" में आ जाता है, जिससे गाने का मूल भाव और भी साफ हो जाता है — यह जीवन की अनिश्चितता, फंसने की भावना और अपनी ही गलतियों के परिणामों पर एक रंगीन, rhythm-filled reflection है।


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