इंक़लाबी ज़िद्दी के बोल | Gandhi Talks फिल्म का यह विचारोत्तेजक गीत A.R. Rahman के संगीत में Shreya Ghoshal की आवाज़ सुनें। Kumaar के बोल पैसे और प्यार के आधुनिक ज़माने पर सवाल उठाते हैं।
Inqalabi Ziddi Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (इंक़लाबी ज़िद्दी)
इंक़लाबी ज़िद्दी, ज़िद्दी
ज़िद है ज़िद्दी सी
है फ़रेबी, फ़रेबी, थोड़ी ज़िद्दी सी
इंक़लाबी ज़िद्दी, ज़िद्दी
ज़िद है ज़िद्दी सी
है फ़रेबी, फ़रेबी, थोड़ी ज़िद्दी सी
ये पैसे वाली रानी
जो रांझा की दीवानी
वो तो है टल्ली
पैसे के नशे में पड़ के
देखे जब भी हीर गुलाबी
घूमे रांझा बन-बन के
छेड़े ये जो तार दिलों के
घुँघरू बाजे तन-मन के
इंक़लाबी ज़िद्दी, ज़िद्दी
ज़िद है ज़िद्दी सी
है फ़रेबी, फ़रेबी, थोड़ी ज़िद्दी सी
ज़िद्दी, ज़िद्दी, ज़िद ज़िद्दी
ज़िद्दी, ज़िद्दी, ज़िद ज़िद्दी
है ज़िद्दी, ज़िद्दी, ज़िद्दी, ज़िद्दी
इंक़लाबी ज़िद ज़िद्दी ज़िद्दी ज़िद्दी
जेबों में चाँदी चमके
यारों के तेवर दमके
और चाल शराबी, ठाठ नवाबी
चलते हैं तन-तन के
शोशा दिखाए सबको
ये मिलता है मतलब को
कि पैसे का है पीर ज़माना
भूल गया है रब को
बे-तहाशा
बे-तहाशा नाचे नाचे
नाचे तिरकिट सी
देख तमाशा आशा आशा
है ये गिरगिट सी
बे-तहाशा नाचे नाचे
नाचे तिरकिट सी
देख तमाशा आशा आशा
है ये गिरगिट सी
ये पैसे वाली रानी
जो रांझा की दीवानी
वो तो है टल्ली
पैसे के नशे में पड़ के
ओ.. सारा ज़माना मटके
नाचे दीवाना हटके
है इंग्लिश वाली फीलिंग देते
कमर के देसी झटके
ये मुंबई की हैं रातें
यहाँ पैसों की बरसातें
जो लूट सको तो लूटो
यारों महफ़िल आते-जाते
इंक़लाबी
इंक़लाबी ज़िद्दी, ज़िद्दी
ज़िद है ज़िद्दी सी
है फ़रेबी, फ़रेबी, थोड़ी ज़िद्दी सी
इंक़लाबी ज़िद्दी.. ज़िद्दी.. सी
है फ़रेबी, फ़रेबी, थोड़ी ज़िद्दी सी
इंक़लाबी ज़िद्दी, है ये फ़रेबी ज़िद्दी
इंक़लाबी ज़िद्दी, है ये फ़रेबी ज़िद्दी
इंक़लाबी ज़िद्दी, है ये फ़रेबी ज़िद्दी
(ज़िद्दी, ज़िद्दी)
गीतकार: कुमार
About Inqalabi Ziddi (इंक़लाबी ज़िद्दी) Song
यह गाना "इंक़लाबी ज़िद्दी" है, जो फिल्म Gandhi Talks का है, इसमें Vijay Sethupathi, Arvind Swami, Aditi Rao Hydari और Siddharth Jadhav मुख्य कलाकार हैं, इस गाने को महान संगीतकार A.R. Rahman ने compose, produce और arrange किया है, और इसे मशहूर गायिका Shreya Ghoshal ने अपनी आवाज़ दी है, गाने के बोल lyricist Kumaar ने लिखे हैं, और यह गाना Saregama Music के अंतर्गत रिलीज़ हुआ है।
गाने के बोल एक ऐसी दुनिया दिखाते हैं जहाँ पैसा सब कुछ है, गाना "इंक़लाबी ज़िद्दी" और "फ़रेबी ज़िद्दी" जैसे शब्दों को दोहराता है, जो एक जिद्दी और धोखेभरी ज़िद को दर्शाते हैं, बोलों में एक "पैसे वाली रानी" का जिक्र है, जो पैसे के नशे में खोई हुई है और रांझा की दीवानी है, यहाँ हीर-रांझा की कहानी को आधुनिक संदर्भ में पेश किया गया है, जहाँ प्यार और रिश्ते भी पैसे के इर्द-गिर्द घूमते हैं, गाने में मुंबई की रातों और पैसों की बरसात का वर्णन है, जो शहरी जीवन की भागदौड़ और भौतिकवादी सोच को दिखाता है।
गाने की धुन और arrangement में A.R. Rahman का अद्भुत टच है, जबकि Shreya Ghoshal की आवाज़ ने इसे और जीवंत बना दिया है, बोल समाज में पैसे के बढ़ते प्रभाव और नैतिक मूल्यों के कमजोर होने पर सवाल उठाते हैं, जैसे "पैसे का है पीर ज़माना, भूल गया है रब को", गाना एक तेज ताल पर है, जो इसे energetic और danceable बनाता है, और यह फिल्म Gandhi Talks के theme के साथ पूरी तरह fit बैठता है, कुल मिलाकर, "इंक़लाबी ज़िद्दी" एक thought-provoking गाना है जो मनोरंजन के साथ-साथ एक सामाजिक संदेश भी देता है।