मैं नहीं जानता के लिरिक्स | Na Jaane Kaun Aa Gaya का दिल तोड़ देने वाला सॉन्ग। Amit Mishra की सुरीली आवाज़ में। बेवफ़ाई और सवालों से भरी ये इमोशनल दास्तान।
Main Nahi Janta Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (मैं नहीं जानता)
हो.. ओ.. ओ.. ओ..
मैं नहीं जानता,
तू ख़फ़ा क्यों हुआ?
मैं नहीं जानता
तू बेवफ़ा क्यों हुआ?
मैं क़दम से क़दम तो मिलाता गया,
मैं नहीं जानता फ़ासला क्यूँ हुआ?
ये जो दूरी है, कैसी मजबूरी है?
तेरे मेरे बीच में,
ये क्या माजरा है?
जिस्म है जलता, जल के पिघलता
क्या मेरी चाहत,
वफ़ा का यही सिला है?
इतना चाहा तुझे
कि खुद को खो दिया,
बदले में जो दिया
मेरा दिल रो दिया
हो.. हे, ओ.. ओ..
छोड़ती नहीं मुझे तेरी बेवफ़ाइयाँ,
छेड़ती रहें मुझे तेरी परछाइयाँ।
तड़प रहा हूँ रात-दिन,
कहूँ तो क्या कहूँ बता?
कम से कम — बताती तो
मेरा गुनाह, मेरी ख़ता —
मैं नहीं जानता
हादसा क्यों हुआ?
मेरे साथ दगा
हुआ तो क्यों हुआ?
तू मेरी आदत थी,
हाँ, इबादत थी।
तू मेरी राहत थी,
रास्ता थी, मंज़िल थी —
पर तू धोखा थी,
तू शगूफ़ा थी,
तू छलावा, तू लतीफा थी।
हे, हो.. ओ.. हे, हो.. ओ..
आसरा तू मेरा, तू ही ज़रिया है,
तू नहीं है, ज़िंदगी सूखा दरिया है।
मुझे मेरी ख़बर नहीं,
मुझे नहीं मेरा पता,
तेरे बगैर जीना ही
जैसे हो कोई सज़ा।
मैं नहीं जानता
तू जुदा क्यों हुआ?
मेरे साथ ही दगा —
हुआ तो क्यों हुआ?
जा रे वो बेवफ़ा,
तेरी हरकत पर तुझे
खुद से कर दूँ रिहा,
कर दूँ तुझको मैं अलविदा।
हाँ अलविदा
तेरी बातों को, साँसों को,
यादों को, लम्हों को,
जितने बिताए — सारे पलों को,
सारी खुशियाँ, सारी रहमत —
सबको करूँ अलविदा..
अलविदा.. अलविदा..
हो.. ओ.. हो.. ओ..
तन में जुनून है,
न रूह को सुकून है,
बस ज़िंदा कोई लाश हूँ,
बिखरा सा एहसास हूँ।
ये सदमा उम्र भर का है,
इस सदमे को मैं जी रहा।
मैं नहीं जानता
तू ख़फ़ा क्यों हुआ?
मैं नहीं जानता
फ़ासला क्यों हुआ?
गीतकार: अतीक अहमद इलाहाबादी
About Main Nahi Janta (मैं नहीं जानता) Song
यह गाना "मैं नहीं जानता" है, जो फिल्म Na Jaane Kaun Aa Gaya का हिस्सा है, इस गाने को Amit Mishra ने गाया है, संगीत Prini Siddhant Madhav द्वारा दिया गया है और बोल Atique Ahmed Allahabadi के लिखे हुए हैं, फिल्म में Jatin Sarna, Madhurima Roy और Pranay Pachauri मुख्य भूमिकाओं में हैं और यह गाना Dhawan Films Originals के तहत रिलीज़ हुआ है।
गाने के बोल एक दर्द भरे इश्क़ की कहानी बयाँ करते हैं, जहाँ गायक अपनी प्रेमिका से सवाल करता है कि तू नाराज़ क्यों हुआ, बेवफ़ा क्यों हुआ, मैं तो हमेशा तेरे साथ कदम से कदम मिलाकर चलता रहा, फिर हमारे बीच यह दूरी क्यों आ गई, यह दूरी कैसी मजबूरी है, तेरे और मेरे बीच यह क्या माजरा है, मेरा शरीर जल रहा है और पिघल रहा है, क्या मेरी चाहत का यही इनाम है, मैंने तुझे इतना चाहा कि खुद को ही खो दिया और बदले में मेरा दिल रो पड़ा।
वह आगे कहता है कि तेरी बेवफ़ाइयाँ मुझे छोड़ती नहीं, तेरी परछाइयाँ मुझे सताती रहती हैं, मैं रात-दिन तड़प रहा हूँ, क्या कहूँ समझ नहीं आता, कम से कम मेरा गुनाह तो बता दे, मैं नहीं जानता यह हादसा क्यों हुआ, मेरे साथ धोखा क्यों हुआ, तू मेरी आदत थी, इबादत थी, राहत थी, रास्ता और मंज़िल थी, लेकिन तू धोखा थी, छलावा थी, तू मेरा आसरा थी और तू ही ज़रिया थी, अब तू नहीं है तो ज़िंदगी सूखा दरिया लगती है, मुझे अपनी ख़बर नहीं, तेरे बिना जीना सज़ा जैसा है, मैं नहीं जानता तू अलग क्यों हुआ, मेरे साथ धोखा क्यों हुआ।
अंत में गायक कहता है कि हे बेवफ़ा, तेरी हरकतों के बाद मैं तुझे खुद से आज़ाद करता हूँ, तुझे अलविदा कहता हूँ, तेरी बातों को, साँसों को, यादों को, लम्हों को, सारे बिताए पलों को, सारी खुशियों को अलविदा, मेरे शरीर में जुनून है लेकिन आत्मा को सुकून नहीं, मैं बस एक ज़िंदा लाश हूँ, बिखरा हुआ एहसास हूँ, यह सदमा उम्र भर का है और मैं इसी सदमे को जी रहा हूँ, मैं नहीं जानता तू नाराज़ क्यों हुआ, यह फ़ासला क्यों हुआ।