बन के मदारी का बंदर के मजेदार फिलॉसॉफिकल बोल – Tochi Raina और Anuj Garg की आवाज़ में Gulabo Sitabo का गहरा गीत। जीवन, लालच और मोह-माया पर करारी चोट। पढ़ें पूरे लिरिक्स।
Ban Ke Madari Ka Bandar Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (बन के मदारी का बंदर)
बनके मदारी का बंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
बनके मदारी का बंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
खन खन खनके गिनती के सिक्के
सांसों टकसाल में
मोह माया ने उलझाया किस फरेबी जाल में
खारे पानी में ढूंढे मीठा समंदर
अरे बनके मदारी का बंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
बनके मदारी का बंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
कीमत लगेगी ठाट वाट की
एक बार चढ़नी है हांडी ये काठ की
कैसा करतब है जाने क्या कब है
उंगली पे झूले नटनी घाट घाट की
चढ़ा है जो सुरूर ये
मरघट के जमघट में
पल में उत्तर जाएगा
दिल का है जब वो कलंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
बनके मदारी का बंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
साहब को जिंदगी ने झटका दिया
लंगोटी से बांधा और लटका दिया
साहब को जिंदगी ने झटका दिया
लंगोटी से बांधा और लटका दिया
मचेगा ऐसा हुल्लड़
बचेगा थोक ना फुटकर
लूटेगी बैरी बन के
खड़ा ना हो तू तन के
अरे हंस ले पगले थोड़ा सा
क्या रखा रोने में
लट्टू घूमें जंतर मंतर
जादू टोने में
दो गज जमीन पूछे कितने सवाल हैं
दो गज जमीन पूछे कितने सवाल हैं
बनके मदारी का बंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
बनके मदारी का बंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
खन खन खनके गिनती के सिक्के
सांसों टकसाल में
मोह माया ने उलझाया किस फरेबी जाल में
खारे पानी में ढूंढे मीठा समंदर
अरे बनके मदारी का बंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
बनके मदारी का बंदर
डुग डुगी पे नाचे सिकंदर
गीतकार: दिनेश पंत
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About Ban Ke Madari Ka Bandar (बन के मदारी का बंदर) Song
यह गाना "Ban Ke Madari Ka Bandar" फिल्म "Gulabo Sitabo" से है, जिसमें Amitabh Bachchan, Ayushmann Khurrana, Farrukh Jaffar और Vijay Raaz जैसे बड़े कलाकार हैं। इस गाने को Tochi Raina और Anuj Garg ने गाया है, जबकि music composer भी Anuj Garg ही हैं और lyrics Dinesh Pant ने लिखे हैं। यह गाना Zee Music Company के लेबल पर रिलीज़ हुआ है, और इसके बोल बहुत ही मजेदार और गहरे मतलब वाले हैं।
गाने की शुरुआत "बनके मदारी का बंदर, डुग डुगी पे नाचे सिकंदर" से होती है, जो एक बंदर की तरह नाचने की मजाकिया इमेजरी बनाता है। यहाँ "सिकंदर" किसी महान राजा या शक्तिशाली व्यक्ति की तरह है, जो दिखावे और मोह-माया के जाल में फंसकर बस एक कठपुतली बन गया है। "खन खन खनके गिनती के सिक्के, सांसों टकसाल में" लाइन से पता चलता है कि पैसे और लालच ने इंसान की सांसों को भी तौलने लगा दिया है, और वह समंदर में मीठा ढूंढ रहा है, यानी असंभव को पाने की कोशिश कर रहा है।
आगे के बोल "कीमत लगेगी ठाट वाट की, एक बार चढ़नी है हांडी ये काठ की" जीवन की अनिश्चितता को दिखाते हैं, जहाँ हर चीज की कीमत है और सब कुछ अस्थायी है। "साहब को जिंदगी ने झटका दिया, लंगोटी से बांधा और लटका दिया" लाइन में जिंदगी की मार और मजबूरी का अंदाज़ा मिलता है। गाने में "हंस ले पगले थोड़ा सा, क्या रखा रोने में" जैसे शब्द जीवन को हल्के में लेने का संदेश देते हैं। "दो गज जमीन पूछे कितने सवाल हैं" यह बताता है कि मौत के बाद सिर्फ दो गज जमीन ही बचती है, फिर भी इंसान बहुत सवाल करता है। कुल मिलाकर यह गाना एक फिलॉसॉफिकल और मजेदार अंदाज़ में जीवन के सच्चे मायने उजागर करता है, जहाँ हर कोई किसी न किसी मदारी का बंदर बनकर नाच रहा है।
Song Details
| Song | बन के मदारी का बंदर लिरिक्स (Ban Ke Madari Ka Bandar Lyrics in Hindi) – Tochi Raina, Anuj Garg | Gulabo Sitabo |
|---|---|
| Album | Gulabo Sitabo Movie Songs Lyrics 2020 |
Frequently Asked Questions
Which album is "बन के मदारी का बंदर लिरिक्स (Ban Ke Madari Ka Bandar Lyrics in Hindi) – Tochi Raina, Anuj Garg | Gulabo Sitabo" from?
The song is from the album "Gulabo Sitabo Movie Songs Lyrics 2020".