धक धक - रे बंजारा लिरिक्स (Dhak Dhak Title Track - Re Banjara Lyrics in Hindi) – Sunidhi Chauhan, Jatinder Singh | Dhak Dhak

धक धक के बोल | Sunidhi Chauhan और Jatinder Singh की आवाज़ में फिल्म का टाइटल ट्रैक। बुल्ले शाह के भजन से प्रेरित यह गीत आज़ादी और बेपरवाही का संदेश देता है।

Dhak Dhak Title Track - Re Banjara Song Poster from Dhak Dhak

Dhak Dhak Title Track - Re Banjara Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (धक धक - रे बंजारा)

बुल्ले शाह एथे सब मुसाफिर 
किसे ना एथे रहना 
आपो अपनी वाट मुकाके, 
सब नू मुड़ना पैणा 
सब नू मुड़ना पैणा 
हो सब नू मुड़ना पैणा 

बैरागी राग ना जाने 
मन-मन को ना पहचाने 
दर-दर भटके तू क्यूँ प्यारा? 

कदमों में तेरे जहाँ है 
फिर क्या तू ढूंढ रहा है? 
तेरे संग चलता है खुद खुदारा 

बेफिक्री मेरे बंदेया 
पंख खोल उड़ जा.. 
मुट्ठी में तेरे आसमान.. 
बह चल नदियों सा तू 
तू हवा से हाथ मिला 
तू खुद से आगे बढ़ चला 

रे बंजारा हो बेपरवाह 
रे बंजारा दिखा परवाज़ 
रे बंजारा तू रब का ताज 
रे बंजारा 
रे बंजारा हो बेपरवाह 
रे बंजारा दिखा परवाज़ 
रे बंजारा तू रब का ताज 
रे बंजारा... 

पढ़ पढ़ेया नू फाज़ल होयों 
कदे अपने आप नू पढ़ेया ही नई 
जा जा वड़दे मंदिर मस्जिद तां 
कदे मन अपने विच वड़या ही नई 
कदे मन अपने विच वड़या ही नई 

हो, हाथों की तेरी लकीरें 
तुझे ही ताक रही हैं 
किस्मत अपनी खुद से लिख जा 
ज़िद कर ले पर्वत भी 
तेरे आगे झुक जाएगा 
तुझ में बसता है ये जहाँ 

रे बंजारा हो बेपरवाह 
रे बंजारा दिखा परवाज़ 
रे बंजारा तू रब का ताज 
रे बंजारा 
रे बंजारा हो बेपरवाह 
रे बंजारा दिखा परवाज़ 
रे बंजारा तू रब का है ताज 
रे बंजारा... 

रे बंजारा हो बेपरवाह 
रे बंजारा दिखा परवाज़ 
रे बंजारा तू रब का है ताज 
रे बंजारा 
रे बंजारा हो बेपरवाह 
रे बंजारा दिखा परवाज़ 
रे बंजारा तू रब का है ताज 
रे बंजारा....!

गीतकार: कुंदन विद्यार्थी, बाबा बुल्ले शाह


About Dhak Dhak Title Track - Re Banjara (धक धक - रे बंजारा) Song

यह गाना "धक धक - रे बंजारा" है, जो Dhak Dhak movie का title track है, इसमें Sunidhi Chauhan और Jatinder Singh की आवाज़ है, music Rishi Dutta ने दिया है, और lyrics Kundan Vidyarthi और Baba Bulleh Shah ने लिखे हैं, यह गाना Zee Music Company पर उपलब्ध है, movie में Ratna Pathak Shah, Dia Mirza, Fatima Sana Shaikh, और Sanjana Sanghi नजर आ रही हैं।

गाने के lyrics में बुल्ले शाह का एक भजन शामिल है, जो कहता है कि सब यहाँ मुसाफिर हैं, किसी को यहाँ रहना नहीं है, अपनी अपनी राह चलकर सबको मुड़ना पड़ता है, फिर गाना एक बंजारे को संबोधित करता है, जो बैरागी है, राग नहीं जानता, अपने मन को नहीं पहचानता, और दर-दर भटक रहा है, गाना उससे पूछता है कि तू क्या ढूंढ रहा है, क्योंकि तेरे कदमों में ही तो पूरा जहान है, और तेरे साथ तो खुदा खुद चलता है।

आगे के हिस्से में गाना एक संदेश देता है, बेफिक्र होकर पंख खोलकर उड़ जाने का, क्योंकि तेरी मुट्ठी में ही आसमान है, तू नदियों की तरह बह चल, हवा से हाथ मिला, और खुद से आगे बढ़ चल, फिर "रे बंजारा" का मंत्र दोहराया जाता है, जो बेपरवाही, उड़ान (परवाज़), और ईश्वर के ताज होने की बात करता है, अंत में गाना कहता है कि किताबें पढ़कर फाज़िल (विद्वान) होने से अच्छा है, खुद को पढ़ो, मंदिर-मस्जिद जाने से अच्छा है, अपने मन के भीतर झांको, क्योंकि तेरी किस्मत की लकीरें तुझे ही देख रही हैं, अपनी किस्मत खुद लिखो, अगर ज़िद करो तो पर्वत भी तेरे आगे झुक जाएगा, क्योंकि यह पूरा जहान तुझ में ही बसता है।


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