सफर पे चले लिरिक्स (Safar Pe Chale Lyrics in Hindi) – Amit Trivedi | Dhak Dhak

सफर पे चले के हिंदी लिरिक्स | Dhak Dhak फिल्म का यह गाना यात्रा और आज़ादी के एहसास को बयां करता है। Amit Trivedi की आवाज़ में पहाड़ी संस्कृति का संगम। पूरे बोल पढ़ें।

Safar Pe Chale Song Poster from Dhak Dhak

Safar Pe Chale Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (सफर पे चले)

हुमणा माठू-माठू हिटणा छै तू 
हिट दे जरा सा 
हाय, ओ माठु जाणा, 
छौड़ी गैंणी लागी 
हिट दे जरा सा 

चल चले, उड़ें, 
हवाओं के संग साथिया 
बह चले 
जहाँ परिंदों सा गाएँ जिया 

वो समा, वो शहर 
बादलों का वो घर 
मन का मौसम जहाँ पे खिले 

हो, धीमे-धीमे हौले रे, 
सुकून जहाँ बोले रे 
ऐसी डगर पे चलें 
हो हो पहाड़ों के कानों में 
कहानियाँ बोले रे 
आज चल सफर पे। 

हो, सूरजों की लाली 
जो गालों पे उछाली 
सवेरा हो गया 
चाय की उकाली 
संग बातें भोली-भाली 
तू प्याली में भर ले यहाँ। 

हाय दास्ताँ सुनाएगा रस्ता तुझे 
लोरी ये वादियाँ 

हो, धीमे-धीमे हौले रे, 
सुकून जहाँ बोले रे 
ऐसी डगर पे चलें 
हो हो पहाड़ों के कानों में 
कहानियाँ बोले रे 
आज चल सफर पे। 

होता है बोलो ऐसा कहाँ? 
ऐसा कहाँ? 
छुए जहाँ उंगलियां आसमाँ 
आसमाँ रे 

बोलो बोलो ऐसा होता कहाँ? 
ऐसा कहाँ? 
छुए जहाँ उंगलियां आसमाँ 

हो, धीमे-धीमे हौले रे, 
सुकून जहाँ बोले रे 
ऐसी डगर पे चलें 
हो हो पहाड़ों के कानों में 
कहानियाँ बोले रे 
आज चल सफर पे। 

हुमणा माठू-माठू हिटणा छै तू 
हिट दे जरा सा 
हाय, ओ माठु जाणा, 
छौड़ी गैंणी लागी 
हिट दे जरा सा...!

गीतकार: अविनाश चौहान, दमयंती दीपा, नवीन कुमार पाट्याल


About Safar Pe Chale (सफर पे चले) Song

यह गाना "सफर पे चले" movie Dhak Dhak से है, जिसमें Ratna Pathak Shah, Dia Mirza, Fatima Sana Shaikh और Sanjana Sanghi मुख्य कलाकार हैं, यह गाना एक खूबसूरत यात्रा और आज़ादी के एहसास को बयान करता है, गाने की शुरुआत Kumaoni और Pahadi भाषा के lines से होती है, जैसे "हुमणा माठू-माठू हिटणा छै तू", जो पहाड़ी संस्कृति और सादगी को दर्शाते हैं। 

गाने के बोल हमें एक सफर पर ले जाते हैं, जहाँ हवाओं के साथ उड़ने, पक्षियों की तरह गाने और बादलों के घर में खो जाने का जिक्र है, lyrics में "मन का मौसम जहाँ पे खिले" जैसे lines दिल की खुशी और शांति को दर्शाते हैं, साथ ही इसमें धीमी चाल, सुकून भरी राह और पहाड़ों में गूँजती कहानियों का जिक्र है, जो एक मनमोहक यात्रा का एहसास दिलाता है। 

गाने में सुबह की लाली, चाय की महक और भोली बातों का सुंदर चित्रण है, जैसे "सूरजों की लाली जो गालों पे उछाली", यह गाना साधारण पलों में छुपी खुशियों को celebrate करता है, Singer Amit Trivedi और Music Anurag Saikia ने इसे एक जीवंत रूप दिया है, जबकि Lyrics Avinash Chouhan, Damayanti ‘Deepa’ और Naveen Kumar Patyal ने इसमें पहाड़ी संवेदनाएँ भरी हैं, अंत में गाना फिर से पहाड़ी lines के साथ खत्म होता है, जो श्रोता को एक सुकून भरे सफर का एहसास देता है।


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