देदे तरकीब के लिरिक्स | Kennedy का गहरा इमोशनल सॉन्ग। Aamir Aziz और Boyblanck की सोलफुल आवाज़। लॉकडाउन की तन्हाई और उलझनों को बयां करता मार्मिक गीत।
Dede Tarqeeb Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (देदे तरकीब)
खाली सड़कें,
किससे करूँ बातें?
लगा लॉकडाउन,
सबने खो दिए ठिकाने।
पैसे कम तो बदले फिर इरादे,
ना पहचाने अपने वो इलाके।
अकेलापन चुभे, सुई बिना धागे,
मास्क पहने बिना
सुबह उठे सारे भागे।
इंटरनेट पे आके बने
सारे जाने-माने,
बीमारी बिना
जान देने के ढूँढे बहाने
रोज़ मैं मरता हूँ
माँ की सलाह लिए बिना,
मैं बिगड़ता हूँ।
याद है वो दिन,
इसलिए याद नहीं करता हूँ,
याद नहीं करता हूँ,
याद नहीं करता हूँ।
तू देदे तरकीब...
देदे तरकीब रहके सबके बीच
कैसे बनूँ रात?
ना जो आँख लगती
आती नहीं नींद
बुलाती है यकीन
मैं देखूँ तब से
आर पार लोगों के...
देदे तरकीब रहके सबके बीच
कैसे बनूँ रात?
ना जो आँख लगती
आती नहीं नींद
बुलाती है यकीन
मैं देखूँ तब से
आर पार लोगों के...
आसमान में टूटे बादलों का हुजूम,
दिल तू क्यों उदास बैठा है?
तू भी झूम।
जिस बात का डर था,
वो हो चुका,
अब डरने की कोई बात नहीं।
अब डरने की कोई बात नहीं,
जिस बात का डर, वो हो चुका।
वो बच्चा जो
माँ की लाश पे बैठा रो रहा था,
वो बच्चा रो रो के सो चुका,
वो सो चुका...
देदे तरकीब रहके सबके बीच
कैसे बनूँ रात?
ना जो आँख लगती
आती नहीं नींद
बुलाती है यकीन
मैं देखूँ तब से
आर पार लोगों के...
देदे तरकीब रहके सबके बीच
कैसे बनूँ रात?
ना जो आँख लगती
आती नहीं नींद
बुलाती है यकीन
मैं देखूँ तब से
आर पार लोगों के....!
गीतकार: आमिर अज़ीज़, बॉयब्लैंक
About Dede Tarqeeb (देदे तरकीब) Song
यह गाना "देदे तरकीब" है, जो Kennedy movie का हिस्सा है, इसमें Rahul Bhat और Sunny Leone मुख्य भूमिका में हैं, और यह गाना Zee Music Company द्वारा रिलीज़ किया गया है, गाने को Aamir Aziz और Boyblanck ने गाया है, साथ ही इसे compose भी उन्होंने ही किया है, और lyrics भी Aamir Aziz और Boyblanck के द्वारा लिखे गए हैं।
गाने के lyrics एक गहरी भावनात्मक कहानी कहते हैं, जो lockdown के दौरान की अकेलापन और उलझन को दर्शाते हैं, lyrics शुरू होते हैं "खाली सड़कें, किससे करूँ बातें?" से, जो शहर की सूनगी और लोगों के बीच दूरी को दिखाता है, फिर बताया गया है कि कैसे पैसे की कमी ने इरादों को बदल दिया, और अपने ही इलाके अजनबी लगने लगे, अकेलापन एक सुई की तरह चुभता है, बिना धागे के, और mask पहने बिना ही सब सुबह भागने लगे, internet पर सब जाने-माने बन गए, बीमारी के बिना ही मरने के बहाने ढूंढे जाने लगे।
गाने का मुख्य भाग "देदे तरकीब" पर केंद्रित है, जहाँ गायक पूछता है कि सबके बीच रहते हुए भी वह अकेला कैसे बन जाता है, रात कैसे बनूँ, जब आँख लगती ही नहीं और नींद नहीं आती, यह यकीन उसे बुलाता है कि वह लोगों के आर-पार देखने लगा है, यह भावनाएं उस उदासी को दर्शाती हैं जो बाहरी दुनिया के साथ तालमेल बिठाने में मुश्किल पैदा करती है।
आखिरी हिस्से में आसमान में टूटे बादलों का हुजूम दिखाया गया है, और दिल से पूछा गया है कि तू उदास क्यों बैठा है, तू भी झूम, क्योंकि जिस बात का डर था वो हो चुका है, अब डरने की कोई बात नहीं बची, और एक मार्मिक दृश्य दिखाया गया है जहाँ एक बच्चा माँ की लाश पर बैठकर रो रहा था, और वो बच्चा रो-रो कर सो चुका है, यह इमेजरी दर्द और अंत में शांति की ओर इशारा करती है, गाना इसी तरह दोहराव के साथ खत्म होता है, जो भावनाओं की गहराई को और बढ़ाता है।