मेरा महबूब के लिरिक्स | Kennedy का सामाजिक संदेश देता मार्मिक गीत। Aamir Aziz की दर्द भरी आवाज़। "एक गोश्त की बोटी के कारण..." – भूख और हिंसा पर करारा प्रहार।
Mera Mehboob Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (मेरा महबूब)
ऐ चाँद सितारों,
ऐ दिलकश नज़ारों,
ऐ बुलबुलें गुलशन
फ़िज़ा की बहारों —
जाओ, मर जाओ।
ऐ हमदर्द वाइज है,
राजा है, रानी है,
दुनिया के बानी —
जाओ, घर जाओ।
ऐ चाँद सितारों,
ऐ दिलकश नज़ारों,
ऐ बुलबुलें गुलशन
फ़िज़ा की बहारों —
जाओ, मर जाओ..।
ऐ हमदर्द वाइज है,
राजा है, रानी है,
दुनिया के बानी —
जाओ, घर जाओ।
एक गोश्त की बोटी के कारण,
दो वक़्त की रोटी के कारण,
एक गोश्त की बोटी के कारण,
दो वक़्त की रोटी के कारण,
मेरा महबूब मारा गया है।
मेरा महबूब —
मारा… हाय हाय।
हाय.... ओ हाय।
अब सिम्बर
ए मेहराब-ओ-मिम्बर,
अब सिम्बर
ए मेहराब-ओ-मिम्बर,
ऐ ऊँचे पहाड़ों,
ज़मीन और अंबर —
जाओ, ढह जाओ।
ऐ मालिक मुनसिफ़
ऐ शहरों मीनारों
नदी के किनारों —
जाओ, बह जाओ।
एक गोश्त की बोटी के कारण,
दो वक़्त की रोटी के कारण,
एक गोश्त की बोटी के कारण,
दो वक़्त की रोटी के कारण,
मेरा महबूब मारा गया है।
मेरा महबूब —
मारा… हाय हाय।
हाय.... आ हा हा।
गीतकार: आमिर अज़ीज़
About Mera Mehboob (मेरा महबूब) Song
यह गाना "मेरा महबूब" है, जो movie Kennedy से है, इसमें Rahul Bhat और Sunny Leone ने अभिनय किया है, यह गाना Zee Music Company पर उपलब्ध है, गाने के singer, composer और lyricist सभी Aamir Aziz हैं।
गाने के lyrics बहुत emotional और social message देने वाले हैं, शुरुआत में poet चाँद, सितारों, दिलकश नज़ारों, बुलबुलों और बहारों को संबोधित करते हुए कहता है — "जाओ, मर जाओ", फिर वह दुनिया के राजा-रानी और बानी से कहता है — "जाओ, घर जाओ", यह एक तरह का protest है, जैसे poet इन सुंदर चीज़ों से भी नाराज़ है क्योंकि उसका महबूब मारा गया है।
फिर गाने का main theme सामने आता है, poet दोहराता है — "एक गोश्त की बोटी के कारण, दो वक़्त की रोटी के कारण, मेरा महबूब मारा गया है", यह lines गाने का दिल हैं, जो समाज में गरीबी, भूख और हिंसा की ओर इशारा करती हैं, poet कहता है कि सिर्फ एक टुकड़े मांस और दो वक़्त की रोटी के लिए उसके प्रिय को मार दिया गया, यह एक दर्दनाक social commentary है।
अंत में, poet अपने गुस्से और दर्द को और बड़े symbols की ओर मोड़ता है, वह मेहराब-ओ-मिम्बर, ऊँचे पहाड़ों, ज़मीन, अंबर, मालिक, मुनसिफ़, शहरों की मीनारों और नदी के किनारों से कहता है — "जाओ, ढह जाओ" या "जाओ, बह जाओ", मतलब poet को अब ये सब बड़ी चीज़ें भी बेमानी लग रही हैं, क्योंकि उसकी नज़र में एक इंसान की जान इन सबसे ज़्यादा कीमती थी, और वह जा चुका है, गाना "मेरा महबूब — मारा… हाय हाय" के साथ खत्म होता है, जो एक deep sorrow और anger को express करता है।