कभी तू भी रोके देख के बोल | Kennedy का कच्चा और दर्द भरा गीत। Boyblanck और Aamir Aziz की गहरी आवाज़ें। ज़िंदगी के संघर्ष और तन्हाई का आइना।
Kabhi Tu Bhi Roke Dekh Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (कभी तू भी रोके देख)
हाज़रीन, हाज़रीन, हाज़रीन…
हाज़रीन दिल थाम के बैठिए,
ये कहानी अब बस ख़त्म पर है।
होंठों पे रखी है
मर जाने की कैफ़ियत,
जीने का दारोमदार
ज़ख्म पर है।
कहते हैं ज़िंदगी
एक बेईमानी का खेल है,
जीत गए तो महल मुनासिब,
हार गए तो जेल है।
आप कहिए, आप कहिए —
आपका भी कुछ लगा
क्या दाँव पर है?
आपकी ज़िंदगी का नमक
मेरे घाव पर है।
मेरी तो, मेरी तो उम्र सारी
तड़पते हुए गुज़री है,
रेलगाड़ी के दरवाज़ों से
लटकते हुए गुज़री है।
मैं तो यूँ तड़पा हूँ
जैसे तड़पते हैं वो लोग
जो अपने बच्चों की ख़ातिर
कोई डरावना-सा भूत बन जाते हैं।
जिसको मिटाना
शहर के लिए लाज़िमी हो जाए,
ऐसा सबूत बन जाते हैं।
चौराहों पर नीलाम उठाया जाता है
जिनका बदन,
जिनसे छीन लिया जाता है
उनका वतन।
जो अपने ही घर में
मेहमान रह जाते हैं,
जो अपने ही जिस्म में
बेजान रह जाते हैं।
आप कहिए, आप कहिए
आपको मज़ा आया कि नहीं?
तफ़रीह हुई पूरी
या यूँ ही बोर हुए
कमरे में बैठे गली का शोर हुए?
कभी तू भी रो के देख,
कैसे यादों की निशानी
बैठी बन के यहाँ पे लेख
ख़ुशी की चिता से आ के
ले लो तुम भी सेक
रुकूँ ना मैं लंबा
काफ़ी सफ़रों में लेट
क्या है मालूम?
क्या पता करना तुझे?
चलती ज़िंदगी है तेज़
और है ब्रेक मेरी फ़ेल।
आगे देखा अंधकार,
और है पीछे मेरे रेल।
मैंने बोला काफी दर्द —
मुझे कहते उसे झेल।
कभी तू भी रो के देख,
कैसे यादों की निशानी
बैठी बन के यहाँ पे लेख
ख़ुशी की चिता से आ के
ले लो तुम भी सेक
रुकूँ ना मैं लंबा
काफ़ी सफ़रों में लेट
क्या है मालूम?
क्या पता करना तुझे?
चलती ज़िंदगी है तेज़
और है ब्रेक मेरी फ़ेल।
आगे देखा अंधकार,
और है पीछे मेरे रेल।
मैंने बोला काफी दर्द —
मुझे कहते उसे झेल।
बैठे-बिठाए अक्सर
कुछ सोच लेते हैं लोग,
रोने की वजह मिलती नहीं है
खोज लेते हैं लोग।
मरहूम के घर में लोग
रुदाली हुए जाते हैं,
अश्कों के कतरों से
खाली हुए जाते हैं।
तुम्हारी आँखों में हुई
एक बहुत बड़ी लूट है,
तुम्हारी आँखों से जो बह रहा
वो आँसू नहीं — झूठ है।
साँस-साँस को तरस गई हवा है,
मेरी रगों में कुछ ज़र्द-सा रवाँ है।
जवान आँखों में बूढ़े ख़्वाब
पलकों के पीछे से
ऐसे झाँक कर देखते हैं
जैसे इफरित
बच्चों की उम्र माँगता है।
सुबह ज़िंदा थे वो लोग,
शाम तलक मर गए।
मेरे इनबॉक्स में
आठ घंटे इंतज़ार करके,
ज़िंदगी की गुहार करके
सो गए लोगों का एक श्मशान है
जिसका क्षेत्रफल
अरब सागर जितना है।
कभी तू भी रो के देख,
कैसे यादों की निशानी
बैठी बन के यहाँ पे लेख
ख़ुशी की चिता से आ के
ले लो तुम भी सेक
रुकूँ ना मैं लंबा
काफ़ी सफ़रों में लेट
क्या है मालूम?
क्या पता करना तुझे?
चलती ज़िंदगी है तेज़
और है ब्रेक मेरी फ़ेल।
आगे देखा अंधकार,
और है पीछे मेरे रेल।
मैंने बोला काफी दर्द —
मुझे कहते उसे झेल।
मैं पूछता हूँ —
कौन है वो?
जिसने उनकी साँस चुराई?
किस पे इल्ज़ाम है?
किस पे रखा जाए?
ज़िंदगी के नाम पर
कब तलक मौत चखा जाए?
कहते हैं समंदर
नमक चाट के बड़ा हुआ है,
और वो कमीना
गला काट के बड़ा हुआ है।
गला काट के अक्सर
बड़े हो जाते हैं लोग,
गला घोंट कर
हो जाते हैं शहंशाह।
पत्थर में लिपटी हुई
मेरी साँस है,
मेरी छाती से उग रहा
अमलतास है।
आख़िरी साँस लेना क्या होता है?
मुझे मालूम नहीं।
लेकिन मुझे मालूम है
आख़िरी साँस की आवाज़
जो मेरे कानों में गूँजती रहती है —
सुबह, शाम, दिन, रात।
जैसे हर शै में समा गई।
मैं इतिहास में ली गई
तमाम आख़िरी साँसों को मिलाकर
एक गीत कहना चाहता हूँ,
जिस पे नाच सकें
नंगी तलवारें लिए हुए लोग
और उनकी भीड़,
और जिस पे नगाड़ा बजा सके
राजे का राजा बेटा।
गीतकार: बॉयब्लैंक, आमिर अज़ीज़
About Kabhi Tu Bhi Roke Dekh (कभी तू भी रोके देख) Song
यह गाना "कभी तू भी रोके देख" Kennedy movie का है, जिसमें Rahul Bhat और Sunny Leone हैं, और यह Zee Music Company पर उपलब्ध है। गाने को Boyblanck गाते हैं, और इसे Aamir Aziz और Boyblanck ने compose किया है, poetry Aamir Aziz ने लिखी और perform की है, जबकि lyrics Boyblanck के हैं। यह गाना एक deep emotional journey है, जो life के pain, struggle और loneliness को बहुत raw तरीके से express करता है। lyrics में "हाज़रीन" का repetition एक gathering या audience को address करता है, जैसे कहानी खत्म होने वाली है, और listener को ध्यान से सुनने के लिए कहा जा रहा है।
गाने की शुरुआत में ही intense imagery है, जैसे होंठों पर मर जाने की कैफ़ियत, और जीने का दारोमदार ज़ख्म पर है, यह बताता है कि singer का जीवन दर्द से भरा है। lyrics कहते हैं कि ज़िंदगी एक बेईमानी का खेल है, जीतने पर महल मिलता है और हारने पर जेल, यह society के unfair rules को दिखाता है। singer listener से सवाल करता है, "आपका भी कुछ लगा क्या दाँव पर है?", यह personal connection बनाने की कोशिश है। उनकी personal struggle describe की गई है, जैसे उम्र तड़पते हुए गुज़री है, रेलगाड़ी के दरवाज़ों से लटकते हुए, यह instability और hardship को दिखाता है।
फिर lyrics और भी dark हो जाते हैं, जैसे वो लोग जो अपने बच्चों की ख़ातिर भूत बन जाते हैं, या जिनका बदन चौराहों पर नीलाम होता है, यह social injustice और sacrifice की बात करता है। गाना कहता है कि कुछ लोग अपने ही घर में मेहमान रह जाते हैं, अपने ही जिस्म में बेजान, यह alienation और identity के loss को express करता है। chorus "कभी तू भी रो के देख" एक challenge की तरह है, listener को उनके दर्द को feel करने के लिए invite करता है, ख़ुशी की चिता से सेक लेने को कहता है, यह pain और memory के mix को represent करता है।
गाने में life की speed और brakes fail होने की बात है, आगे अंधकार और पीछे रेल, यह trapped feeling देता है। lyrics बताते हैं कि लोग बैठे-बिठाए रोने की वजह खोज लेते हैं, और आँसू भी झूठ हो सकते हैं, यह emotional honesty पर सवाल उठाता है। powerful lines हैं जैसे सुबह ज़िंदा थे वो लोग, शाम तक मर गए, या इनबॉक्स में ज़िंदगी की गुहार करके सो गए लोगों का श्मशान, जो modern life की isolation और despair को show करता है।
अंत में, गाना सवाल करता है कि किसने साँस चुराई, और किस पे इल्ज़ाम लगाया जाए, यह injustice और accountability की तलाश है। lyrics कहते हैं कि कुछ लोग गला काट के बड़े हो जाते हैं और शहंशाह बन जाते हैं, यह cruel reality को highlight करता है। आख़िरी साँस की आवाज़ का ज़िक्र है, जो हर शै में गूँजती है, और singer इतिहास की आख़िरी साँसों को मिलाकर एक गीत बनाना चाहता है, जिस पर नंगी तलवारें लिए लोग नाच सकें, यह rebellion और catharsis की desire को express करता है। overall, यह गाना एक powerful commentary है pain, society और human struggle पर, जो listener को deeply move कर सकता है।